उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों में जर्जर भवनों के चिन्हांकन, सत्यापन, मूल्यांकन और ध्वस्तीकरण का अभियान तेज कर दिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इस काम में कोई लापरवाही न हो। बच्चों और शिक्षकों की जान को जोखिम में डालने वाले जर्जर ढांचों की पहचान कर तुरंत तकनीकी समिति को सत्यापन के लिए सूची सौंपी जाए। यदि किसी भी जिले में जर्जर भवन से जुड़ी कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित अधिकारी को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।
त्वरित कार्रवाई पर फोकस
शासन की ओर से साफ कर दिया गया है कि इस मामले में कोई समझौता नहीं होगा। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर “सुरक्षा, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई” को प्राथमिकता दी जाए। हर जिले में पहले से चिह्नित भवनों की भी समीक्षा की जा रही है और उनके संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे जा चुके हैं।
स्कूलों की सूची एक हफ्ते में
वहीं 50 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों को स्कूलों के विलय यानी ‘पेयरिंग’ से मुक्त रखने की सरकार की घोषणा पर अमल भी जारी है। लेकिन भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के चलते चिन्हीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
बख्शा नहीं जाएगा
स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा के ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के चलते शिक्षा विभाग के कई अफसर राहत कार्यों में लगे हैं। लेकिन हम चार से पांच दिनों में पेयरिंग से मुक्त किए जाने वाले स्कूलों की सूची तैयार कर लेंगे। सरकार की यह सख्ती साफ संकेत है कि अब बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, और शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और संरचना सुधार को लेकर गंभीर कदम उठाए जाएंगे।





