देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका व्यक्तित्व किसी विशेष सुविधा या संसाधनों का परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से गढ़ा गया है।
विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने बचपन से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व सीखा।
संघर्ष और संस्कारों की सीख
अपने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना। उन्होंने कहा, “साधारण जीवन शैली ने मुझे हमेशा जमीन से जोड़े रखा। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने मेरे विचारों और निर्णयों को आकार दिया है।”
“जीवन में ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। यही मूल्य आज भी मेरे हर निर्णय और कार्यशैली का आधार हैं।”- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति में माता के सर्वोच्च स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृशक्ति परिवार की धुरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि परिवार, जो समाज की मूल इकाई है, सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी स्वतः सशक्त होंगे।
बदलते पारिवारिक मूल्य और आधुनिक चुनौतियां
सीएम धामी ने आधुनिक समय में पारिवारिक संरचना में आ रहे बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समय के साथ संयुक्त परिवारों का स्वरूप सीमित हुआ है और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ा है। इसके कारण सामूहिकता और आत्मीयता का भाव कहीं न कहीं प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा, “आधुनिक जीवनशैली, व्यस्तता और प्रतिस्पर्धा के कारण परिवारों के बीच संवाद में कमी आई है। विवाह-विच्छेद की बढ़ती घटनाएं और परिवार संस्था से दूर जाने की प्रवृत्तियां एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत हैं।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन परिवार की मूल भावना त्याग, सहयोग, जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मातृशक्ति और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए विश्वमांगल्य सभा के निरंतर प्रयासों की सराहना की और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।





