
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दुकानों और प्रतिष्ठानों में महिलाओं को रात्रि पाली में काम करने की सशर्त छूट दे दी है। इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान गंवाने वालों के आश्रितों को दी जाने वाली मुआवजा राशि भी बढ़ा दी गई है।
महिला सशक्तीकरण और रोजगार को बढ़ावा
कैबिनेट ने राज्य की दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में महिला कर्मचारियों को रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक की पाली में काम करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें अनिवार्य की गई हैं। नियोक्ता को महिला कर्मचारी से पहले लिखित सहमति लेनी होगी और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। सरकार का मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, ‘उत्तराखंड दुकान और स्थापन (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 2017’ में संशोधन को भी मंजूरी दी गई, जिससे छोटे प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा और बड़े प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को कानूनी लाभ सुनिश्चित होंगे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर राहत
एक अन्य बड़े फैसले में, कैबिनेट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। इसके लिए ‘मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि (संशोधन) नियमावली, 2025’ को मंजूरी दी गई। यह फैसला मुख्यमंत्री धामी द्वारा की गई पूर्व घोषणा के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वन्यजीव हमलों से प्रभावित परिवारों को अधिक आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
प्रॉसिक्यूशन डिपार्टमेंट होगा मजबूत, 46 नए पद सृजित
न्यायालयों में सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन विभाग के ढांचे का पुनर्गठन किया गया है। इसके तहत पहले चरण में चार जिलों—देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल—में सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) के 46 अतिरिक्त पद सृजित करने को मंजूरी दी गई है। इस कदम से अभियोजन संवर्ग मजबूत होगा और मुकदमों के निस्तारण में तेजी आएगी।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
कैबिनेट बैठक में कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगी।
- देहरादून में प्रस्तावित मेट्रो नियो परियोजना पर केंद्र सरकार के सुझावों से मंत्रिमंडल को अवगत कराया गया और आगे के मार्गदर्शन पर चर्चा हुई।
- उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के वर्ष 2022-23 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की स्वीकृति दी गई।
- प्राधिकरण क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता के संबंध में लाए गए प्रस्ताव पर पुनः परीक्षण करने का निर्णय लिया गया है।

