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विदिशा में शर्मनाक विवाद: 90 साल की मां को रखने पर बेटों में बंटवारा, पंचायत ने कराया समाधान

Written by:Bhawna Choubey
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विदिशा से सामने आया यह मामला रिश्तों की सच्चाई और समाज की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। 90 वर्षीय मां, जिन्होंने अपने बेटों को लाखों रुपये दिए, बुढ़ापे में सहारे के लिए भटकती रहीं, आखिरकार पुलिस पंचायत के हस्तक्षेप से न्याय मिला।
विदिशा में शर्मनाक विवाद: 90 साल की मां को रखने पर बेटों में बंटवारा, पंचायत ने कराया समाधान

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर गहरी चोट की है। जिस उम्र में माता-पिता को बच्चों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में एक 90 वर्षीय मां अपने ही बेटों से रहने की गुहार लगा रही थी। बुधवार को टीजन थाने में आयोजित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत में जब यह मामला पहुंचा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। मां की आंखों में उम्र का दर्द था और आवाज में बेबसी। चार बेटे होने के बावजूद उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं था।

चार बेटे, फिर भी बुढ़ापे में अकेली मां

इस 90 वर्षीय वृद्धा ने पुलिस पंचायत में बताया कि उनके चार बेटे हैं। जब बेटे जवान थे, तब मां ने अपने भविष्य की चिंता किए बिना अपनी जमा पूंजी उन्हें सौंप दी। प्रत्येक बेटे को पांच-पांच लाख रुपये दिए गए, ताकि वे अपना जीवन ठीक से बिता सकें। उस समय मां को यह भरोसा था कि जरूरत पड़ने पर बेटे उनका सहारा बनेंगे।

लेकिन वक्त के साथ हालात बदलते गए। मां के अनुसार जब उनकी उम्र बढ़ी और उन्हें देखभाल की जरूरत हुई तो बेटे जिम्मेदारी लेने से बचने लगे। पारिवारिक विवाद इतना बढ़ा कि मां को रखने के लिए आपसी सहमति से एक अजीब फैसला किया गया। तय हुआ कि चारों बेटे बारी-बारी से एक-एक महीने मां को अपने पास रखेंगे। शुरुआत में यह व्यवस्था चली, लेकिन एक माह पूरा होते ही अगला बेटा मां को रखने से मुकर गया। यहीं से विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और मां को मजबूर होकर पुलिस पंचायत का सहारा लेना पड़ा।

पुलिस पंचायत में छलका मां का दर्द

सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत में जब वृद्धा ने अपनी आपबीती सुनाई तो माहौल गंभीर हो गया। मां ने साफ कहा कि उन्होंने कभी अपने बच्चों से बदले में कुछ नहीं मांगा सिर्फ बुढ़ापे में सम्मान और देखभाल की उम्मीद की थी। पुलिस पंचायत के सदस्यों ने चारों बेटों को बुलाकर पूरे मामले की सुनवाई की। बातचीत के दौरान यह साफ हुआ कि जिम्मेदारी से बचने के लिए बेटे एक-दूसरे पर बोझ डाल रहे थे। कोई भी बेटा मां को स्थायी रूप से रखने को तैयार नहीं था। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि सीनियर सिटीजन के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय माना।

पुलिस पंचायत का सख्त और संतुलित फैसला

कई घंटे की सुनवाई और समझाइश के बाद पुलिस पंचायत ने इस मामले में स्पष्ट और सख्त आदेश दिया। पंचायत ने तय किया कि चारों में से एक बेटा मां को स्थायी रूप से अपने पास रखेगा। इसके साथ ही बाकी तीन बेटे हर महीने एक-एक हजार रुपये मां के खर्च के लिए देंगे। यह फैसला सिर्फ मां की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए नहीं बल्कि बेटों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराने के लिए भी लिया गया। पंचायत का मानना था कि मां को हर महीने अलग-अलग जगह भेजना उनके स्वास्थ्य और सम्मान दोनों के लिए ठीक नहीं है।

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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