पत्थरों का भी दिल होता है, इन चट्टानों को देखकर हो जाएगा यकीन, देखिए कुदरत का जादू

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Social Media Viral : क्या पत्थरों का भी दिल होता है ? अब आप कहेंगे कि भला ये कैसा सवाल है। पत्थर तो पत्थर है..बल्कि कठोर ह्रदय वालों को अक्सर पत्थर दिल कहकर पुकारा जाता है। ऐसे में पत्थरों का दिल कैसे हो सकता है। लेकिन ये संसार ऐसे अथाह रहस्यों से भरा है, जिनकी हम कल्पना तक नहीं कर सकते। हमारी कल्पनाओं की भी एक सीमा है..लेकिन कुदरत का जादू असीमित है।

खदान से मिली ये अनमोल चट्टान

आज हम आपको ऐसा कुछ दिखाने जा रहे हैं..जो किसी तिलस्म से कम नहीं। हम आपको दिखा रहे हैं पत्थरों का दिल। उरुग्वे और ब्राजील के बीच स्थित खदानों में खनिकों को कुछ अद्भुत चट्टानें मिली हैं, जिनपर पर्पल कलर का जगमगाता हुआ दिल बना हुआ है। इससे संबंधित पोस्ट इंस्टाग्राम पर Unilad नाम के अकाउंट से शेयर की गई है और कैप्शन में लिखा है ‘जब खनिकों ने इस चट्टान को तोड़ा, तो उन्हें धरती माता द्वारा पहले से तैयार किया गया एक असाधारण हृदय मिला। श्रमिकों ने उरुग्वे और ब्राज़ील की सीमा पर अद्भुत क्वार्ट्ज जियोड (quartz geode) की खोज की, जब उन्होंने एक चट्टान को तोड़ा और उसके प्रत्येक तरफ एक सुंदर बैंगनी दिल पाया।⁠ एक श्रमिक ने जीएनएन को बताया कि उन्हें चट्टानों की मिलान जोड़ी के लिए पहले ही 120,000 डॉलर की बोली मिल चुकी है। बेसाल्ट के कारण, उनका अनुमान है कि इसका वजन 150 पाउंड (80 किग्रा) से अधिक होगा।⁠’

श्रमिकों को खुदाई के दौरान ये चट्टान मिली और जब उन्होने इसे दो टुकड़ो में तोड़ा तो इसके भीतर क्रिस्टल के चमचमाते हुए खूबसूरत दिल का आकार बना हुआ था। ये इतना खूबसूरत है कि इससे नज़रें हटाना मुश्किल है। ऐसा लगता है जैसे किसी चित्रकार या मूर्तिकार ने अपनी कलाकारी उकेरी हो। लेकिन कहते हैं न कि कुदरत से बड़ा न तो कोई कलाकार है न ही जादूगर। ये भी कुदरत के जादू का एक ऐसा ही नमूना है। फिलहाल सोशल मीडिया पर ये पोस्ट वायरल हो रही है और लोग इस ‘पत्थर के दिल’ को देखकर आश्चर्यमिश्रित खुशी जता रह हैं।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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