आगर-मालवा जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। इंदौर-कोटा नेशनल हाईवे पर सुसनेर के मोड़ी चौराहे के पास पाउडरनुमा केमिकल से भरे एक ट्रक में अचानक आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरा ट्रक लपटों से घिर गया। हाईवे पर गुजर रहे वाहन चालकों, स्थानीय दुकानदारों और आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज थी कि काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। आग के कारण कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ। सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को घटनास्थल से दूर रखा गया और पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी गई। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
केमिकल ट्रक में आग बुझाना बना बड़ी चुनौती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक में मौजूद सामग्री सामान्य माल नहीं थी, बल्कि पाउडर के रूप में कोई केमिकल भरा हुआ था। यही वजह रही कि आग बुझाने का काम आसान नहीं था। आग बार-बार सुलग रही थी और केमिकल की प्रकृति स्पष्ट नहीं होने के कारण फायर ब्रिगेड को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
सुसनेर और सोयत से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। एसडीओपी देवनारायण यादव के मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ट्रक में कौन सा केमिकल भरा हुआ था और उसका उपयोग किस काम में किया जाता है। आग के स्रोत तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने अलग रणनीति अपनाई। दो जेसीबी मशीनों की मदद से ट्रक के जले हुए हिस्सों को हटाया गया और अंदर मौजूद सामग्री को बाहर निकाला गया। इसके बाद लगातार पानी और अन्य संसाधनों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल से जुड़े हादसों में समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, क्योंकि कई पदार्थ गर्मी मिलने पर और अधिक खतरनाक हो सकते हैं।
हाईवे पर रुका ट्रैफिक, जांच में जुटा प्रशासन
करीब एक घंटे से अधिक समय तक चले रेस्क्यू और फायर फाइटिंग ऑपरेशन के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। हालांकि ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसे भारी नुकसान पहुंचा है। हादसे के दौरान पुलिस ने हाईवे पर बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक को नियंत्रित किया, ताकि किसी अन्य दुर्घटना की आशंका न रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग आसपास खड़े अन्य वाहनों या किसी ज्वलनशील सामग्री तक पहुंच जाती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कर रहे हैं। साथ ही ट्रक में मौजूद केमिकल की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि खतरनाक और केमिकल सामग्री की ढुलाई के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वाहनों की नियमित जांच, सुरक्षित पैकिंग और आपातकालीन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।






