बालाघाट जिले में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की नींद उड़ा दी है। जिस फसल को किसान महीनों पसीने से सींचते हैं, वह अब कीटों और रोगों की मार से कमजोर पड़ती दिख रही है।
दरअसल, लंबे समय तक छाये बादलों और मौसम के उतार-चढ़ाव की वजह से धान की फसल पर माहू कीट और झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। इससे खेतों में खड़ी लहलहाती फसल अब मुरझाने लगी है।
लांजी इलाके में सबसे ज्यादा असर, बिगड़ा गणित
जिले के लांजी क्षेत्र में माहू का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी रकम खर्च करने के बाद फसल खराब होने से किसान कर्ज और लागत को लेकर चिंतित हैं। आपको बता दें कि कई परिवारों की सालभर की जरूरतें इसी फसल की कमाई पर टिकी होती हैं। ऐसे में पैदावार घटने की आशंका से किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
गाँवों में पहुँचीं कृषि विभाग की टीमें
फसलों पर गहराते संकट को देखते हुए कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। विभाग के संयुक्त दल गाँवों में पहुँचकर फसलों का जायजा ले रहे हैं और किसानों को बचाव के तरीके बता रहे हैं। दरअसल, कृषि अधिकारी रासायनिक दवाओं के साथ-साथ निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे देसी जैविक उपायों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सही छिड़काव से कीटों पर काबू पाया जा सकता है।
मुआवजे की मांग, विधायक ने दिया भरोसा
इस पूरे मामले पर लांजी विधायक राजकुमार कर्राहे ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वे किसानों की समस्या को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर चर्चा करेंगे। आपको बता दें कि अब परेशान किसानों की नजरें सरकार पर टिकी हुई हैं। किसानों की मांग है कि सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि अधिकारी खेतों में पहुँचकर नुकसान का सही आकलन करें और प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।






