बालाघाट में दर्दनाक हादसा! जहरीली गैस से कुएं में उतरे दो किसानों की मौत, बढ़ी चिंता

बालाघाट कुआं हादसा ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में कुओं के अंदर बनने वाली जहरीली गैस के खतरे को सामने ला दिया है। मोटर पंप निकालने के लिए कुएं में उतरे दो किसानों की दम घुटने से मौत हो गई।
बालाघाट में दर्दनाक हादसा! जहरीली गैस से कुएं में उतरे दो किसानों की मौत, बढ़ी चिंता

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र के पीपरटोला गांव में गुरुवार देर शाम दर्दनाक हादसा हो गया। खेत की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला मोटर पंप खराब होने पर दो किसान उसे ठीक करने के लिए कुएं में उतरे, लेकिन अंदर मौजूद जहरीली गैस की चपेट में आ गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद एसडीईआरएफ और पुलिस की टीम ने कई घंटे की मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला।

मृतकों की पहचान 45 वर्षीय महेश भारत लाल चौधरी और 55 वर्षीय युवराज चंदन लाल बिसेन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि एक किसान के नीचे गिरने के बाद दूसरा उसे बचाने के लिए कुएं में उतरा, लेकिन वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया। रात में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों के शव बाहर निकाले गए। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

कुएं की जहरीली गैस कैसे बन रही जानलेवा?

बारिश के मौसम में खेतों में धान की रोपाई शुरू होने के साथ ही किसान सिंचाई के लिए कुओं का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। कई बार कुओं में लंबे समय तक पानी जमा रहने और जैविक पदार्थ सड़ने की वजह से मीथेन समेत दूसरी जहरीली गैसें बन जाती हैं। ये गैसें नीचे की सतह पर जमा रहती हैं और ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है।

ऐसे में बिना जांच या सुरक्षा उपकरण के कुएं में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी कुएं में काफी समय से सफाई नहीं हुई हो या उसमें हवा का पर्याप्त प्रवाह न हो, तो अंदर उतरने से पहले गैस की जांच करना जरूरी है। रस्सी, ऑक्सीजन सपोर्ट और सुरक्षा उपकरणों के बिना कुएं में उतरना बड़ा जोखिम बन सकता है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण लोग सीधे कुएं में उतर जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।

तीन दिन में तीसरी घटना

बालाघाट की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले तीन दिनों के भीतर मध्य प्रदेश में कुएं में जहरीली गैस से जुड़ी यह तीसरी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले मैहर जिले के खरमसेड़ा गांव और बालाघाट के भरवेली थाना क्षेत्र में भी इसी तरह के हादसे हुए थे। इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई और कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रशासन और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राम पंचायतों के स्तर पर किसानों को कुओं में उतरने से पहले जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही, आपात स्थिति में तुरंत बचाव दल को सूचना देने और बिना सुरक्षा के किसी दूसरे व्यक्ति को बचाने के लिए कुएं में न उतरने की सलाह भी दी जानी चाहिए।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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