वरिष्ठ अधिकारी की टिप्पणी -‘हैंडपंप उखाड़ शिकायतकर्ता की छाती पर गाड़ दो’

वरिष्ठ अधिकारी की टिप्पणी -‘हैंडपंप उखाड़ शिकायतकर्ता की छाती पर गाड़ दो’

भिंड।गणेश भारद्वाज।

सीएम हेल्पलाइन पर की हेड पंप खराब होने की शिकायत पर पीएचई के कार्यपालन यंत्री पी आर गोयल का बचकाना जवाब देखने को मिला है। कार्यपालन यंत्री ने पोर्टल पर अपनी टिप्पणी में लिखा कि शिकायतकर्ता पागल है उसको मिर्गी के झटके आते हैं अंट संट बोलता है इसके पूरे परिवार को मिर्गी के झटके आते हैं हैंडपंप खराब नहीं है उसका दिमाग खराब है । कार्यपालन यंत्री यहीं नहीं रुके आगे उन्होंने लिखा कि मेरे हेड पंप मेकेनिक के शिकायतकर्ता पागल ने कपड़े फाड़ दिए थे अब समय आ गया है चीनी युद्ध किया जाए जो गोरिल्ला नीति है। हेडपंप को उखाड़ कर शिकायतकर्ता की छाती पर गाड़ दिया जाए। मामले ने तूल पकड़ा तो बीते रोज आनन-फानन में उक्त हेड पंप ठीक कराया गया है। पीएचई के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यपालन यंत्री आरपी गोयल को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है। लहार क्षेत्र के रहावली निवासी राहुल दीक्षित ने सीएम हेल्पलाइन (181) पर शिकायत की थी। लहर पीएचई विभाग में पदस्थ इस अधिकारी की बचकानी हरकत की सोशल मीडिया पर चारों और आलोचना की जा रही है और लोग मांग कर रहे हैं इस अधिकारी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए अब देखना यह है कि कलेक्ट्रेट वीरेंद्र रावत इस अधिकारी के विरुद्ध क्या कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को लिखते हैं। जिले के पीएचई विभाग के हालात और ब्लॉक में कुछ ऐसे ही है तमाम शिकायतें लंबित है और तमाम जगह न केवल हेडपंप बल्कि बड़ी-बड़ी विशाल का है पेयजल सप्लाई परियोजनाएं भी बंद पड़ी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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