भोपाल निगम हाईवे पर लोगों को जूते-चप्पल बांटने का कर रहा है काम

भोपाल निगम हाईवे पर लोगों को जूते-चप्पल बांटने का कर रहा है काम

भोपाल। हाथों में सामान, गोदी में बच्चे और नंगे पैर मीलों का सफर तय करने को मजबूर हैं देश के मजदूर| इस तपती गर्मी में हाईवे पर हर तरफ मजदूरों (laborers) का जत्था अपने घर के तरफ कूच करता साफ देखा जा सकता है| इन मजदूरों के पास ना तो खाने का लिए खाना है और नाही कोई व्यवस्था जिसके दम पर यह अपने घर जा सकें| विडंबना देखिए कि जिन चप्पलों को पहन यह मजबूर निकले थे उसने भी मंजिल आने से पहले ही साथ छोड दिया| ऐसे में इन मजदूरों की मदद करने का एक फैसला भोपाल नगर निगम (Bhopal City Corporation) ने लिया है| ताकि इन प्रवासी मजदूरों के सफर को थोड़ा आसान बनाया जा सके|

नगर निगम दे रहा है हाईवे पर मजदूरों को सामान
भोपाल नगर निगम इन मजदूरों को जरूरी सामान देने का काम कर रहा है| दरअसल नगर निगम की टीम लोगों के घरों से सामान इकठ्ठा कर रही है| जो भी सामान आपके घर में रखा हो और जिसे आप प्रयोग में नहीं ले रहे हैं जैसे कपड़े, जूते-चप्पल, टोपी, छतरी, गमछा या और भी जरूरी सामान जो सफर के समय जरूरत में आता हो वो आप नगर निगम की टीम को दे सकते हैं| निगम की टीम यह सामान हाईवे पर अपने शहर की तरफ जा रहे लोगों को बांटने का काम कर रहा है| ताकि मजदूरों की मदद की जा सके| अब तक निगम अमला शहर की 10 से ज्यादा कॉलोनियों से सामान इकठ्ठा कर चुका है| साथ ही इस सामान को उठाने के लिए निगम ने गाड़ियां लगा रखी हैं| जो एकत्रित सामान को इकठ्ठा कर उन्हे लोगों तक पहुंचाने का काम करती हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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