भोपाल का यह इलाका बनता जा रहा है चीन का ‘वुहान’

भोपाल का यह इलाका बनता जा रहा है चीन का ‘वुहान’

भोपाल। राजधानी दो भागों में बंटी हुई है| इसमें से कुछ हिस्सा नए भोपाल (Bhopal) में तो कुछ पुराने भोपाल (Old Bhopal) में है| लेकिन कोरोना (Corona) का कहर शहर के पुराने हिस्से में ज्यादा देखने को मिल रहा है| पुराने भोपाल का जहांगीराबाद (Jahangirabad) तो चीन (China) के वुहान (Wuhan) जैसा हो गया है| हालत यह है कि यहां लगभग हर गली में एक कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहा है| जहांगीराबाद में तकरीबन 60 हजार लोग रहते हैं| जिन पर इस समय संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है| इस क्षेत्र की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि यहां 2 क्षेत्र अगर कटेंनमेंट फ्री होते हैं तो इसकी जगह 5 कंटेंनमेंट में शामिल हो जाते हैं |

भोपाल में 950 के पार संक्रमित मरीजों की संख्यां पहुंच गई है और जहांगीराबाद से ही 25 प्रतिशत मरीज इस लिस्ट मे शामिल हैं| संख्यां की बात करें तो यहां से 240 कोरोना मरीजों की पुष्टि हो चुकी है| स्क्रीनिंग की बात करें तो यहां से 9000 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और 5000 हजार से ज्यादा सैंपल लिए जा चुके हैं| इस क्षेत्र के हालातों को देखते हुए यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा की दृष्टि से कहीं ओर शिफ्ट किया जा रहा है|

पुराने भोपाल के यह क्षेत्र हैं ज्यादा प्रभावित
जिंसी मार्केट, नीम वाली रोड, राज टॉकिज, एबिन मार्केट, काबली पुरा, अहीरपुरा ,न्यू कॉलोनी, चिकलोद, चर्च रोड़, कोलीपुरा, शीट मोहल्ला, बडवाली मस्जिद, जिंसी मस्जिद के पीछे, फरीद स्ट्रीट, बापू कॉलोनी आदि सहित ऐसे बहुत से गली मोहल्ले है पुराने भोपाल के जो संक्रमित हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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