अक्षय कांति बम के नामांकन वापस लेने के बाद विवेक तन्खा का इंदौरवासियों से आह्वान ‘नोटा दबाकर संसदीय प्रणाली को बचाएं’

उन्होंने कहा कि जो शहर स्वच्छता के लिए जाना जाता था, आज इस गंदगी के लिए प्रचारित हो रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इंदौर की जनता अपना रोष नोटा एवं जनआक्रोश के माध्यम से ज़ाहिर कर भारतीय इतिहास में शहर को रेखांकित कर सकती है।
अक्षय कांति बम के नामांकन वापस लेने के बाद विवेक तन्खा का इंदौरवासियों से आह्वान ‘नोटा दबाकर संसदीय प्रणाली को बचाएं’

Lok Sabha Elections 2024 : राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने कहा है कि इंदौर की घटना ने हमारी प्रजातांत्रिक प्रणाली को शर्मसार किया है। इंदौर के गौरवशाली सांसदी इतिहास को कलंकित किया है। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र को बचाना है तो ऐसी हरकतों की निंदा होनी चाहिए। पब्लिक के पास नोटा का ऑप्शन आज भी है।

‘पहले बूथ कैप्चरिंग, अब प्रत्याशी कैप्चरिंग’

विवेक तन्खा ने एक्स पर लिखा है कि ‘पहले बूथ कैप्चरिंग, अब प्रत्याशी कैप्चरिंग।’ बीजेपी लीडर्स की सोच पे तरस आता है। यह सब हाए तोबा इंदौर सीट के लिए। बीजेपी १९८४ के पश्चात यह सीट नहीं हारी। पीसी सेठी जी के पश्चात सुमित्रा ताई जैसे सांसदों ने इंदौर नगरी को गौरवान्वित किया। “अक्षय” के कृत्य से संसदीय प्रणाली कलंकित महसूस कर रही है। कांग्रेस प्रत्याशी के कृत्य ने देश को शर्मसार किया। जनता को विचार करना चाहिए कि आगे ऐसे कृत्य एवं धोका फिर करने की हिम्मत ना हो। जनता अपना रोष नोटा एवं जनआक्रोश के माध्यम से भारतीय इतिहास में इंदौर को रेखांकित कर सकती है।’

‘स्वच्छता के लिए जाना जाने वाला शहर इस गंदगी के लिए प्रचारित हो रहा है’

उन्होंने कहा कि हम सब इंदौर के प्रशंसक हैं। स्वच्छता में..राजनीति में नेतृत्व दिया है। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी को मेनिपुलेट करके उसका नामांकन वापस कराया, उससे इंदौर कलंकित हुआ है। उसकी छवि धूमिल हुई है। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी ने ऐसा क्यों किया। वो तो अच्छा कर रही थी। 1984 के बाद कांग्रेस वहाँ अभी नहीं जीती तो क्या उनको आशंका थी कि वो हार जाते। आख़िर उन्हें ये सब करने की ज़रुरत क्यों पड़ी। आज सारे विश्व में ये चर्चा का विषय बन गया है। जो शहर स्वच्छता के लिए जाना जाता था, आज इस गंदगी के लिए प्रचारित हो रहा है।

इंदौरवासियों से नोटा का इस्तेमाल करने की अपील

विवेक तन्खा ने कहा कि क्या आपने कभी नेहरु जी के समय या इंदिरा जी या राजीव गांधी के समय ये सुना था कि जब कांग्रेस का पूर्ण बहुमत होता था तो उन्होंने विपक्ष के व्यक्ति को ऐसे हटाया हो? वो भी कर सकते थे लेकिन कभी नहीं किया। हमें विपक्ष को सम्मान देना होता है प्रजातंत्र में। अगर हम संविधान को सम्मान देते हैं तो विपक्ष को भी सम्मान देना चाहिए। अब समय आ गया कि हमें संसदीय प्रणाली को बचाना है। उन्होंने इंदौरवासियों से आग्रह किया कि उनके पास नोटा का विकल्प है। अगर ऐसे समय इंदौर नोटा को चुनता है तो संभव है कि वो देश में एक इतिहास रच दे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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