
भोपाल। ये उन लोगों के लिये अच्छी खबर है जिन्हें मय और मयखाने से खास लगाव है। शिवराज सरकार ने लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खोलने की अनुमति दी है। इसके लिए इन शर्तों का पालन करना जरूरी है-
- शराब दुकानों पर साफ सफाई रखने, आवागमन ना करने एवं पर्याप्त दूरी बनाए रखने आदि के संबंध में पोस्टर प्रदर्शित करें।
- शराब दुकानों के सामने एक 1 मीटर के फासले पर गोल घेरे के निशान बनाए ताकि उपभोक्ता के मध्य एक दूसरे से पर्याप्त दूरी बनी रहे।
- शराब दुकानों के सामने भीड़ इकट्ठी ना हो एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कड़ाई से करने के लिए अनुज्ञप्तिधारी एक व्यक्ति निरंतर निगरानी के लिए नियुक्त किया जाए, जो कड़ाई से नियमों का पालन कराएगा। यदि किसी दुकानों पर भीड़ दिखाई देती है तो उस दुकान को लॉकडाउन समय तक के लिए बंद कर दिया जाएगा।
- शराब दुकानों पर कार्यरत कर्मचारियों को हाइजीन की दृष्टि से जागरूक करें तथा स्वयं सैनिटाइजर एवं दस्तानों का उपयोग कर ड्यूटी करें और उपभोक्ताओं को जागरूक करें।
- शराब दुकानों के सामने उपभोक्ताओं के हाथों को सैनिटाइज करने के उद्देश्य से पानी साबुन सैनिटाइजर की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- शराब दुकानों से विक्रय होने वाला उत्पाद स्वच्छ एवं साफ जगह पर संग्रहित हो मदिरा दुकानों पर लगने वाले ताले कुंडी आदि स्थान जो संपर्क में आते हैं उन्हें सैनिटाइज करते रहें।
- शराब दुकानों में अहाता सुविधा पूर्णता प्रतिबंधित रहेगी।
- शराब दुकान के खुलने के समय 10:00 से 5:00 बजे तक शराब की दुकानें खुली ही रखी जाए और बाकी समय में शराब दुकान पूरी तरह बंद रखा जाना सुनिश्चित करें।
उपरोक्त शर्तों का कड़ाई से पालन न किए जाने पर शराब की दुकानें कभी भी किसी भी समय बंद कर जाने के आदेश दिए जा सकेंगे।
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma
निदेशक और संपादक
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →

