क्या बजट सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष?

क्या बजट सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष?

भोपाल। मध्यप्रदेश का बजट सत्र नजदीक है। ऐसे में विपक्ष की तरफ से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश जारी है। विपक्ष आए दिन किसी ना किसी नई रणनीति के साथ सरकार को घेरने के प्रयास में है। जिसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर कमलनाथ(Kamalnath) सरकार पर दबाव बनाने के लिए अपनी कमर कस ली है।

सोमवार को हुई एक बैठक जिसमें बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष वी.डी शर्मा(V.D. sharma) शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chouhan), गोपाल भार्गव(Gopal Bhargava) के साथ बीजेपी के अन्य विधायक मौजूद रहे।

क्षेत्रीय उपचुनाव के साथ उन्होंने अपनी एकजुटता को बजट सत्र में भी दिखाने का संकल्प लिया। इस बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं पर ज्यादा बल दिया गया।

विश्वास सारंग का सरकार पर आरोप

कमलनाथ पर आरोप लगाते हुए विश्वास सारंग ने बताया कि अभी तक किसानों की कर्ज माफी नहीं हुई है जिसका उन्हें उपचुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यह सरकार झूठी घोषणाओं की सरकार है।

नहीं हो रहा प्रोटोकॉल का पालन – गोपाल भार्गव

वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कांग्रेस राज में विधायकों का अपमान हो रहा है। ना ही उन्हें किसी सरकारी कार्यक्रम में बुलाया जा रहा है और ना ही निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। कमलनाथ सरकार को आड़े हाथ लेते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि अभी तक कन्यादान विवाह योजना की राशि नहीं मिलने की वजह से कई महिलाओं के तलाक हो गया और कई महिलाओं को नगर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ओलावृष्टि से फसलें हुईं बर्बाद जिसकी खबर लेने वाले तो कोई नहीं है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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