मध्यप्रदेश के जर्जर पुलों को लेकर कमलनाथ ने सरकार को घेरा, कहा “क्या जनता की जान इतनी सस्ती हो गई है”, जांच की मांग

पूर्व सीएम कहा कि बड़ी संख्या में पुल खराब हालत में होने के बावजूद उन पर यातायात जारी है जिससे लोगों की जान जोखिम में है। उन्होंने पुलों की मरम्मत में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र तकनीकी जांच, खतरनाक पुलों पर भारी वाहनों के लिए रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
Madhya Pradesh Farmers

Kamal Nath

कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में जर्जर पुलों और सड़क सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों पर दौड़ती बसें और डंपर अब सिर्फ यातायात का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि हर समय मंडराते खतरे का संकेत बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पुल खराब हालत में हैं, इसके बावजूद सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।

पूर्व सीएम ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि प्रदेश में 253 पुल जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर मरम्मत के नाम पर सिर्फ सीमेंट का लेप चढ़ाकर पुलों को सुरक्षित घोषित कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता की जान इतनी सस्ती हो गई है कि भ्रष्टाचार की परत चढ़ाकर पुलों को फिर से चालू कर दिया जाए।

कमलनाथ ने जर्जर पुलों को लेकर सरकार से किए सवाल 

कमलनाथ ने जबलपुर में रेलवे ओवरब्रिज धंसने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरे प्रदेश को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि एमपीआरडीसी द्वारा 46 पुलों को बेहद खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद उन पर भारी वाहनों की आवाजाही जारी है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है और क्या किसी गंभीर दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलों में लगी सरिया तक जंग खाकर कमजोर हो चुकी है और संरचना भी खराब हो गई है, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि “जनता की जान को खतरे में डालने वाला आपराधिक कृत्य” है।

जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग 

कमलनाथ ने कहा है कि जब सरकारी एजेंसियां खुद पुलों को खतरनाक बता चुकी हैं तो उन पर यातायात जारी रखना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि खतरनाक पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही क्यों नहीं रोकी गई और वैकल्पिक मार्ग क्यों विकसित नहीं किए गए। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलों की मरम्मत और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि मरम्मत पर कितना खर्च हुआ, किन कंपनियों को ठेके दिए गए और गुणवत्ता की जांच किसने की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है या नहीं।

कमलनाथ ने सरकार से मांग की कि सभी जर्जर पुलों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, खतरनाक घोषित पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही तुरंत रोकी जाए और दोषी अधिकारियों तथा ठेकेदारों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो इसे प्रशासनिक विफलता ही नहीं बल्कि जनता के साथ विश्वासघात माना जाएगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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