MP में यूरिया की अधिक कीमत वसूलने और जबरन अन्य उत्पाद बेचने का आरोप, 48 FIR, कमलनाथ ने पूछा “क्या यही किसान कल्याण मॉडल है”

पूर्व मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सामने आई जानकारी के आधार पर आरोप लगाया कि प्रदेश में किसानों से व्यापक स्तर पर अतिरिक्त वसूली हुई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि लंबे समय तक चल रही इन गड़बड़ियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसी के साथ उन्होंने किसानों को अधिक वसूली की रकम वापस कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
Madhya Pradesh Farmers

Kamal Nath

मध्यप्रदेश में यूरिया खाद की अधिक कीमत वसूली और जबरन अन्य उत्पाद बेचने के मामलों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा है कि विधानसभा में सरकार की तरफ से दी गई जानकारी प्रदेश के किसानों के साथ हो रही खुली लूट की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खुद स्वीकार रही है कि यूरिया अधिक दामों पर बेचा गया और खाद के साथ दूसरे उत्पाद किसानों को जबरन दिए गए। इसपर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब यह सब लंबे समय से चल रहा था तब सरकार क्या कर रही थी। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी या जानबूझकर अनदेखी की गई। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या यही “किसान कल्याण” का मॉडल है।

यूरिया बिक्री में अनियमितताओं को लेकर कमलनाथ ने सरकार को घेरा

कमलनाथ ने कहा है मध्यप्रदेश विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में यूरिया से जुड़े 48 मामलों में एफआईआर दर्ज होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में इस तरह के घटनाएं बताती हैं कि व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस रद्द करने और निलंबन जैसी कार्रवाई तभी होती है जब अनियमितताएं प्रमाणित हो जाती हैं, जिससे साफ है कि किसानों से अतिरिक्त वसूली हुई और नियमों का उल्लंघन किया गया।

प्रदेश सरकार से सवाल

पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि खाद जैसे जरूरी कृषि उत्पाद के साथ किसानों को कीटनाशक और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि पहले से महंगे डीजल, बीज और मौसम की मार झेल रहे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना किसान हितैषी नीति नहीं कहा जा सकता। इसी के साथ कमलनाथ ने ई-विकास पोर्टल और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू करने की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल निगरानी जरूरी थी तो इसे पहले लागू क्यों नहीं किया गया और किसानों की जेब कटने के बाद सुधार की बात क्यों की जा रही है।

कांग्रेस नेता ने की ये मांग

कमलनाथ ने यह आशंका भी जताई कि सामने आए 48 मामलों से अधिक अनियमितताएं हो सकती हैं, क्योंकि कई किसानों ने डर या निराशा में शिकायत दर्ज नहीं कराई होगी। उन्होंने पूछा कि जिन किसानों से अधिक वसूली हुई है, उन्हें राशि वापस कब और कैसे मिलेगी। इसी के साथ उन्होंने सरकार से मांग की कि अधिक वसूली की भरपाई, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने पर स्पष्ट जवाब दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ आंकड़ों से नहीं बल्कि न्याय से जवाब चाहते हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews