कांग्रेस की हालत के लिए मुकेश नायक ने दिग्विजय को ठहराया जिम्मेदार

कांग्रेस की हालत के लिए मुकेश नायक ने दिग्विजय को ठहराया जिम्मेदार

भोपाल. कांग्रेस (congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री (former minister) मुकेश नायक ( mukesh nayak) ने मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कांग्रेस की वर्तमान हालत के लिए राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह (digvijay singh) को जिम्मेदार ठहराया है। एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए मुकेश नायक ने कहा कि दरअसल यह पूरी लड़ाई राजा और महाराजा के राज्यसभा में जाने के वर्चस्व की लड़ाई थी और दोनों इस में सफल हो गए ।लेकिन इस बीच इस पूरे घटनाक्रम का फायदा बीजेपी (bjp) ने उठाया और वर्तमान हालत के लिए इन दोनों के बीच का झगड़ा जिम्मेदार है। इतना ही नहीं, मुकेश नायक ने वर्तमान हालत के लिए दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बंगलुरु में ठहरे हुए विधायक दिग्विजय सिंह से मिलना ही नहीं चाहते क्योंकि वे जानते हैं कि वर्तमान परिवेश में जो स्थिति बनी है उसके जिम्मेदार दिग्विजय सिंह ही हैं ।दिग्विजय सिंह केवल फेस सेविंग के लिए बंगलुरु गए हैं। विधायकों ने खुद अपने वीडियो जारी करके कहा है कि वे दिग्विजय सिंह के कारण ही बेंगलुरु मे रह रहे हैं। विधायक दिग्विजय सिह के कारण ही बीजेपी में आए हैं। अगर कमलनाथ खुद बंगलुरु जाते तो शायद कुछ फायदा हो सकता था ।अब दिग्विजय सिंह यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अंतिम समय तक कांग्रेस की लड़ाई लड़ रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व इन सब बातों को निरपेक्ष भाव से देख रहा है। अब इस बात की जिम्मेदारी उन लोगों पर है जिन्होंने सरकार बनाई और सरकार चला रहे हैं कि बिगड़ी हुई बातों को संभाले

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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