एसआई को महंगा पड़ा ‘सिंघम’ वाला स्टंट, जांच के आदेश, 5 हजार का जुर्माना

एसआई को महंगा पड़ा ‘सिंघम’ वाला स्टंट, जांच के आदेश, 5 हजार का जुर्माना

भोपाल| कोरोनाकाल में लॉक डाउन (Lockdown) के बीच जहां पुलिस के जवान सच्चे हीरो बनकर उभरे हैं| वहीं इस संकट के समय एक सब इंस्पेक्टर (Sub Inspector) का ‘सिंघम स्टाइल’ में वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है| वहीं दूसरी तरफ इस वीडियो के वायरल होने के बाद दमोह एसपी हेमंत चौहान ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं|

दरअसल, सोशल मीडिया पर दमोह जिले के देहात थाना अंतर्गत आने वाले वाली नरसिंहगढ़ चौकी के प्रभारी एसआई मनोज यादव (SI Manoj Yadav) का एक वीडियो सोशल मीडिया (Video Viral) पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है| वीडियो में सब इंस्पेक्टर सिंघम स्टाइल में दो कारों में पैर रखकर चलते नजर आ रहे हैं। लॉक डाउन के समय जब पुलिस कर्मियों पर बड़ी जिम्मेदारी है ऐसे में इस तरह के वीडियो को लेकर लोग सवाल भी उठा रहे हैं| हालाँकि सब इंस्पेक्टर यादव का कहना है कि वे लाॅकडाउन के तीन महीने पहले इंदौर पुलिस ट्रेनिंग के लिए गए थे । वहां पर इस वीडियो को शूट किया था। इस समय वीडियो अचानक कैसे वायरल हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

एसपी ने बिठाई जांच, पांच हजार का जुर्माना
दमोह एसपी हेमंत चौहान ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं| दमोह के सीएसपी मुकेश अबिद्रा को ये जांच सौंपी गई है और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उस हिसाब से कार्यवाही की जाएगी| वहीं चौकी प्रभारी के वर्दी में स्टंट बाजी पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया है|

मनोज यादव इससे पहले भी सोशल मीडिया पर कई वीडियो अपलोड कर चुके हैं, वो टिकटॉक पर भी अपने वीडियो डालते रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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