बैंगलुरु घटनाक्रम : राज्यपाल से मिलने पहुंचे 70 कांग्रेस विधायक, की ये मांग

बैंगलुरु घटनाक्रम : राज्यपाल से मिलने पहुंचे 70 कांग्रेस विधायक, की ये मांग

भोपाल।

एमपी में जारी घमासान के बीच पल पल घटनाक्रम मे बदलाव देखने को मिल रहा है।एक तरफ बैंगलुरु में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आमरण अनशन पर बैठ गए है वही सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों और फ्लोर टेस्ट को लेकर सुनवाई की जा रही है। इसी बीच कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल फिर राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचा है।इस दौरान कांग्रेस के करीब 70 विधायक भी बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे ।यहां उन्होंने बेंगलुरु में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कैबिनेट मंत्री-विधायकों के साथ हुई अभद्रता को लेकर राज्यपाल से शिकायत की।वही पुलिस द्वारा दिग्विजय सिंह को कांग्रेस के बागी विधायकों से ना मिलने की भी बात कही। उन्होंने राज्यपाल कहा कि आप अपने संविधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए बंधक बनाए गए विधायकों को भोपाल के लिए  ज्ञापन सौंपा।

वही राजभवन के बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री प्रियव्रत सिंह ने कहा कि बीजेपी लोकतंत्र की हत्या कर रही है। राज्यसभा उम्मीदवार दिग्विजय सिंह अपने विधायकों (मतदाताओ)से बेगलुरु मिलने गए थे ।उनको क्यों नही मिलने दिया जा रहा है।अगर उन्हें वोट नही देना है तो साफ मना कर दे। वो अकेले मिलेंगे ये मांग कर रहे थे। अकेले दिग्विजय सिंह होटल के अंदर जाते, ऐसे में अकेले किसी के लिए वो खतरा कैसे हो सकते है।वही विधायकों के ना मिलने को लेकर कहा कि वो ये बात आकर मप्र आकर कहे। मप्र से उन्होंने चुनाव लड़ा है और यही से जीते है तो वहां से क्यो बयान दे रहे है।कर्नाटक की जनता ने तो उन्हें नही चुना, मध्यप्रदेश की जनता ने उन्हें चुना है।

सुरक्षा को लेकर कहा कि अगर मध्यप्रदेश में 107 विधायक सुरक्षित रह सकते है तो ये 16 क्यों नही।अगर खतरा है तो सीआरपीफ, जीआरपी या आर्मी लेकर आए लेकिन मध्यप्रदेश में आकर अपना फैसला सुनाए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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