वीर बाल दिवस पर सीएम डॉ मोहन यादव ने भोपाल स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेका, बोले- इस गौरवशाली इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद भारत सरकार ने 2022 में ये घोषणा की थी कि हर साल 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाया जाएगा ताकि राष्ट्रीय युवा पीढ़ी साहिबजादों की वीर गाथा से प्रेरणा ले सकें।
Veer Bal Diwas CM Dr. Mohan Yadav visited gurdwara in Bhopal

Veer Bal Diwas CM Dr. Mohan Yadav visited gurdwara in Bhopal

सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी, साहिबजादा फतेह सिंह जी, विशेष रूप से छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अदम्य वीरता और बलिदान की स्मृति में समर्पित विशेष दिन को आज पूरा देश वीर बाल दिवस के रूप में मना रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने साहिबजादों के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए X पर लिखा- “गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों, साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी, साहिबजादा फतेह सिंह जी के बलिदान दिवस ‘वीर बाल दिवस’ पर उन्हें सादर नमन-वंदन करता हूं। धर्म एवं मानवता के लिए उनका त्याग विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।”

सीएम डॉ मोहन यादव ने गुरुद्वारे में मत्था टेका 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस विशेष अवसर पर राजधानी भोपाल के हमीदिया रोड पर स्थित गुरुद्वारे पर पहुंचे और वहां मत्था टेका, इस मौके पर सीएम ने गुरुद्वारा परिसर में साहिबजादों के जीवन, त्याग और वीरता पर आधारित चित्र प्रदर्शनी को देखा और उसकी प्रशंसा की।

वीर साहिबजादों की शहादत हमें आज भी प्रेरित करती है 

गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा चारों साहिबजादों के साथ अत्याचारियों ने जो किया वो क्रूरता की पराकाष्ठा थी, आज वर्षों बाद भी ये बात सुनकर हमारी रूह कांप जाती है लेकिन देश और समाज से प्रेम करने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार ने जो अदम्य साहस दिखाया और हँसते हँसते प्राण न्योछावर कर दिए ये आज भी हमें प्रेरणा देते हैं।

सरकारी स्तर पर 26 दिसंबर को मनाया जायेगा बाल दिवस 

मुख्यमंत्री ने कहा इन छोटे छोटे बच्चों ने जो शहादत दी सच्चे अर्थों ने यही बाल दिवस है, इसलिए हमने सरकारी स्तर पर 26 दिसंबर के दिन इसे मनाने का फैसला किया है, उन्होंने कहा कि हम इस गौरवशाली इतिहास को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्क्रम में शामिल करेंगे, उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा की गई कुछ मांगों पर भरोसा दिया कि जल्दी ही सरकार इसपर विचार करेगी।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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