लॉकडाउन खत्म होने के साथ आवागमन के साधन शुरू होने का इंतज़ार, लोग करवा रहे एडवांस बुकिंग

लॉकडाउन खत्म होने के साथ आवागमन के साधन शुरू होने का इंतज़ार, लोग करवा रहे एडवांस बुकिंग

भोपाल। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से देशभर में 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया है। इस दौरान सारे आवागमन के साधन भी ठप पड़ गए हैं, सार्वजनिक यातायात बंद पड़े हैं और फिलहाल कोई ट्रेन या प्लेन नहीं चल रहा। लोगों को लॉक डाउन खत्म होने के साथ ही यातायत के साधनों का दोबारा शुरू होने का भी बेसब्री से इंतजार है।

अगर लॉक डाउन आगे नहीं बढ़ता है तो जनता का इंतजार 13 दिन बाद खत्म हो जाएगा और 15 मार्च से लोग फिर यात्रा कर पाएंगे। इसे लेकर लोगों में इतना उत्साह है कि उन्होने अभी से 15 तारीख और उसके बाद की बुकिंग शुरू कर दी है। इस डर से कि शायद लॉक डाउन खत्म होने के बाद टिकिट्स और सीट्स न मिले, कई लोग अभी से रेलवे और हवाई जहाजों में एडवांस बुकिंग करवा रहे हैं।

बता दें कि लॉक डाउन के दौरान सारे यातायात के साधन बंद होने से लोग बेहद परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस दौरान सबसे अधिक परेशानी गरीब मज़दूर वर्ग उठा रहा है जो अलग अलग स्थानों पर अपनी रोज़ी रोटी कमाने गया है। अब कोई साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण सैंकड़ों लोग पैदल ही अपने अपने घरों में लौटने के लिये निकल पड़े हैं। ऐसे लोगों को भी लॉक डाउन खत्म होने का बेसब्री से इंतजार है ताकि उनकी जिंदगी फिर पटरी पर लौट सके।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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