BJP का स्थापना दिवस आज, मोदी ने कार्यकर्ताओं से किए ये 5 आग्रह

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नई दिल्ली।
आज भाजपा का 40वां स्थापना दिवस है। 80 के दशक में आज ही के दिन यानी 6 अप्रैल 1980 को भाजपा का गठन हुआ था और 1984 के चुनाव में बीजेपी ने महज दो सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन Coronavirus के कारण देशभर में Lockdown है और ऐसे में भाजपा ने अपने इस स्थापना दिवस को घर में ही मनाने की अपील की है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम वीडियो संदेश जारी किया है और इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में योगदान के लिए कहा है।

ये है पांच पीएम मोदी के आग्रह-
मोदी ने कहा कि आप मेरे पंच-आग्रह मान सकते हैं।इसमें पहला आग्रह है, गरीबों को राशन के लिए अविरत सेवा अभियान।
दूसरा आग्रह है कि अपने साथ ही आप 5-7 अन्य लोगों के लिए फेस-कवर बनवाएं और उनका वितरण करें
तीसरा आग्रह है, धन्यवाद अभियान के लिए।पार्टी ने पांच अलग-अलग वर्ग बनाए हैं।
पहला वर्ग – नर्सेस और डॉक्टर्स हों,
दूसरा वर्ग – सफाई कर्मचारी
तीसरा वर्ग – पुलिसकर्मी
चौथा वर्ग- बैंक और पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी,
पांचवां वर्ग- आवश्यक सेवाओं में जुटे हुए सभी कर्मचारी।

मेरा चौथा आग्रह है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद करने के लिए एक ‘आरोग्य सेतु ऐप’ विकसित किया गया है।ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी दें और कम से कम 40 लोगों के मोबाइल में ये ऐप इंस्टॉल भी करवाएं। लाखों लोग PM-CARES फंड में दान कर रहे हैं।

मेरा पांचवां आग्रह है कि इसमें प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता को खुद भी सहयोग करना है और 40 अन्य लोगों से भी PM-CARES फंड में सहयोग करने के लिए प्रेरित करना है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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