सज्जन वर्मा का बड़ा बयान, मोदी ने किसानों को मजबूर किया, आज लालकिले में घुसे, कल तुम्हारे घर में भी घुसेंगे

सज्जन वर्मा का बड़ा बयान, मोदी ने किसानों को मजबूर किया, आज लालकिले में घुसे, कल तुम्हारे घर में भी घुसेंगे

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली (Farmers Tractor Rally Delhi) के दौरान हिंसा को लेकर सियासत गरमा गई है| एक तरफ जहां कुछ नेता प्रदर्शनकारियों की हिंसा की निंदा कर रहे हैं तो वहीं कुछ इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) को ही दोषी मान रहे हैं| मध्य प्रदेश कांग्रेस (Mp Congress) के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा (Sajjan Verma) ने बड़ा बयान दिया है| उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अन्नदाता को मजबूर किया है किसान आज लाल किले में घुसे हैं, कल उनके घरों में भी घुसेंगे।

अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता सज्जन वर्मा ने किसानों के दिल्ली में हुए प्रदर्शन में हिंसा पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया है| उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और पूरे मंत्रिमंडल की संवेदनाएं मर चुकी हैं| देश के अन्नदाताओं के सब्र का इम्तिहान कब तक लेंगे, दो महीने से कड़कड़ाती ठंड में भूख हड़ताल, आंदोलन अपने भविष्य के लिए किसान कर रहे हैं| जिसे इस समय खेत में होना चाहिए वो अपने बच्चों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, 157 लोग मर चुके हैं, इन्हे शहीद का दर्जा देना चाहिए|

कांग्रेस नेता ने कहा देश का अन्नदाता एक सीमा तक व्यवहार को कुशलता पूर्वक निभाता है, लेकिन जब उसके पेट पर आ जाती है तो ऐसा ही होता है| इसके लिए नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं, सब्र का बाँध टूटा तो किसान आज लाल किले में घुसे हैं, कल उनके घरों में भी घुसेंगे। नरेंद्र मोदी जी अडानी और अंबानी की गुलामी करने से अच्छा है देश के अन्नदाता की गुलामी करो, जिससे देश का भला हो सके।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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