पूर्व मंत्री को मनाने पहुँचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, बन्द कमरे में हुई मंत्रणा

पूर्व मंत्री को मनाने पहुँचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, बन्द कमरे में हुई मंत्रणा

देवास। सोमेश उपाध्याय।

सियासत के सन्त कहे जाने वाले एमपी के पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी के सामने अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की बड़ी चुनोती सामने आई है।इसका मुख्य कारण सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक मनोज चौधरी है,जो हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए है!वही प्रदेश नेतृत्व से हाटपिपलिया उपचुनाव में चौधरी को हरी झंडी मिलने के संकेत बाद से ही जोशी के बगावती सुर पार्टी हाईकमान तक पहुंचे थे! उसके बाद से ही हाईकमान में जोशी को भोपाल तलब किया था! हाटपिपलिया से दो बार लगातार विधायक रहे दीपक जोशी अपने सियासी संकट को भाप चुके हैं!

जोशी विगत एक माह से ही हाटपिपलिया बागली विधानसभा में सक्रिय है! वे लगातार अपने समर्थक बागली विधायक पहाड़ सिंह कन्नौज को साथ लेकर विधानसभा के गांवों का दौरा कर कार्यकर्ता व समर्थकों से मंत्रणा करते दिखाई दे रहे हैं! जिसके बाद शुक्रवार को सिंधिया समर्थक मनोज चौधरी ने बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर स्थित निवास पर मुलाकात करि। चौधरी ने मुलाकात को सामान्य भेंट बताया परंतु चौधरी की मुलाकात के अगले दिन राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय दीपक जोशी के आवास पर पहुंचे उनसे मुलाकात करि और फिर पूर्व विद्यायक मनोज चौधरी को भी बुलाया व दोनों को साथ बैठा कर बंद कमरे में उनसे मंत्रणा किया है! सूत्रों के हवाले से यह खबर है कि विजयवर्गीय जोशी को मनाने पहुंचे हैं। मुलाकात का सियासी रुख किस प्रकार होगा यह तो वक्त ही बताएगा परंतु वर्तमान में इस मुलाकात से क्षेत्र की राजनीति जरूर गर्मा गई है!

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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