सिविल अस्पताल में सेवाएं बंद, आवश्यक वस्तुओं की Delivery के लिए महिलाओं को हो रही भारी परेशानी

सिविल अस्पताल में सेवाएं बंद, आवश्यक वस्तुओं की Delivery के लिए महिलाओं को हो रही भारी परेशानी

सेवढा।दतिया।सत्येंद्र रावत

नगर के एक मात्र सिविल अस्पताल जो अब काँटेन्मेंट जॉन घोषित हो चुका है । जिससे इलाज के लिए लोगों को अब काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा । वहीं महिलाओं को भी अब डिलेवरी में भारी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है । पहले जहां पर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को फीवर क्लीनिक के माध्यम से छोटी मोटी विमारियों का इलाज किया जा रहा था लेकिन स्टाफ नर्स के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद अब इलाज मिलना भी बंद हो गया ।

डिलीवरी के लिए 35 किमी की दूरी नगर की आबादी का एक बड़ा तबका सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर है । जहां से उसे इलाज समय पर और फ्री में मिलता है ।वहीं महिलाओं की डिलिवरी भी आसानी से हो जाती है लेकिन जबसे अस्पताल में काम करने बाली स्टाफ नर्स की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है तभी से महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी हो गयी है और 35 किमी की दूरी तय करना पड़ रही है । जिससे समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है। आपको बता दें कि डिलेवरी के लिए महिलाओ को इन्दरगढ़ 35 किमी ,भिंड के लहार 25 किमी या फिर मौ 18 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है । या फिर दतिया 65 किमी की दूरी तय करना पड़ेगी।

एक महीने में औसतन 120 डिलेवरी

नगर के एक मात्र सिविल अस्पताल पर नगर की ही 30,000 की आवादी निर्भर हो रही है। इसके अलावा नहला, बस्तूरी, अटरा, भगुआपुरा, थरेट के अलावा मगरोल क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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