Shivraj Cabinet: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अपने समर्थक मंत्रियों से “श्रीमंत” करेंगे वन टू वन चर्चा

Shivraj Cabinet: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अपने समर्थक मंत्रियों से “श्रीमंत” करेंगे वन टू वन चर्चा

भोपाल। मध्यप्रदेश में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार हो गया। जिसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए मंत्रियों के साथ बैठक की है। प्रदेश भर में यह भी चर्चा तेज है कि प्रदेश की शिवराज सरकार में दबदबा ज्योतिरादित्य सिंधिया का ही बना रहा है। वहीं सीएम शिवराज के साथ होने वाले बैठक के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपने समर्थकों के साथ वन टू वन बात करेंगे। इसमें आगामी उपचुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जा सकती है|

समर्थकों को मंत्री बनाए जाने के बाद अब सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। वहीं जो समर्थक मंत्री नहीं बन पाए हैं। सिंधिया उनसे भी मुलाकात करेंगे। वहीं इससे पहले सिंधिया ने बयान देते हुए ये तो साफ कर दिया है कि उनका पूरा ध्यान उपचुनाव पर है। सिंधिया ने कहा कि 24 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में जनता 15 महीने की भ्रष्टों की सरकार को जवाब देगी। न्याय के रास्ते पर चलना हम सबका धर्म है।

वहीं इससे पहले भोपाल में राजभवन में सादगी और गरिमामय समारोह में प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 28 नये मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी| इस विस्तार में सिंधिया खेमे से 9 और कांग्रेस से भाजपा में आए तीन चेहरों सहित बीजेपी के 16 विधायक को जगह मिली। इसी के साथ बीजेपी के कई पूर्व मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पायी है। वहीं नवनियुक्त मंत्रिमंडल में करीबन 41% मंत्री अब सिंधिया समर्थक है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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