UPI लेन-देन पर लग सकती है लिमिट, RBI से चर्चा कर रहा है NPCI, इस दिन से बदल सकते हैं नियम, जानें यहाँ

UPI लेन-देन पर लग सकती है लिमिट, RBI से चर्चा कर रहा है NPCI, इस दिन से बदल सकते हैं नियम, जानें यहाँ

UPI Transactions Limit: ऑनलाइन लेन-देन के यूपीआई एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। देश की बड़ी आबादी इसका इस्तेमाल करती है। लेकिन बहुत जल्द इसमें बड़ा बदलाव हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम UPI भुगतान की सर्विस के लिए एक लिमिट तय कर सकता है। ट्रान्जैशन की सीमा 30 प्रतिशत तक हो सकती है। इस बात की चर्चा फिलहाल NPCI रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ कर रहा है। एनपीसीआई 31 दिसंबर के बाद इस मामले पर अपना फ़ैसला घोषित कर सकता है।

नहीं हुआ अब तक कोई फैसला

बता दें की यूपीआई थर्ड पार्टी द्वारा संचालित प्लेटफॉर्म है। जिसके लिए एनपीसीआई ने एकाधिकार जोखिम से बचने के लिए इस साल नवंबर में UPI पर 30% लेनदेन सीमा लगाने का प्रस्ताव आरबीआई के सामने रखा था। फिलहाल, आरबीआई ने इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन चर्चा जारी है।

इस महीने NPCI कर सकता है घोषणा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले को लेकर व्यापक रूप से विचार करने के लिए एक बैठक भी बुलाई गई है। इस दौरान वित्त मंत्रालय, आरबीआई के सीनियर ऑफिर्स और एनपीसीआई के अधिकारी भी शामिल हुए थे, लेकिन इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया। दूसरी तरफ गूगल पे और फोन पे की मार्केट में हिस्सेदारी बढ़कर 80% तक चुकी है। कहा जा रहा है की एनपीसीआई थर्ड पार्टी के ऐप प्रदाताओं के खतरे को देखते हुए और आरबीआई द्वारा मंजूरी मिलने पर इस महीने के अंत यूपीआई लेन-देन को लिमिट करने का फैसला सुना सकता है।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews