
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) केवल बैंकों को ही नहीं बल्कि नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को भी रेगुलेट करने का काम करता है। नियमों को लेकर हमेशा सख्ती दिखाता रहता है। 21 अगस्त को एक बार फिर आरबीआई की कारवाई सामने आई है। इस बार केंद्रीय बैंक ने एक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी पर पेनल्टी लगाई है। यह कदम नियमों का सही से अनुपालन न होने पर उठाया गया है।
14 अगस्त 2025 के जारी एक आदेश के तहत अयोध्या फिनलीज लिमिटेड (कंपनी) पर आरबीआई ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस एनबीएफसी ने “मास्टर निर्देश-गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी”, “नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी-गैर प्रणालिगत रूप से महत्वपूर्ण गैर जमा स्वीकार करने वाली कंपनी निर्देश 2016″ से संबंधित नियमों का अनुपालन नहीं किया। इसके अलावा आरबीआई (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी- पैमाना आधारित विनियमन” निर्देश 2023 के से जुड़े कुछ प्रावधानों का अनुपालन भी नहीं कर पाया।
पहले जारी किया था नोटिस
जब आरबीआई को नियमों के अनुपालन में खामियों का पता चला तो इस कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया। यह पूछा गया कि उस पर पेनल्टी क्यों लगाया जाए? कंपनी द्वारा प्राप्त प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुति और दस्तावेजों के आधार पर जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया। यह कदम केंद्रीय बैंक में आरबीआई एक्ट 1934 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया है।
कंपनी ने तोड़ा यह नियम
ईक्विटी कैपिटल के शेयरहोल्डिंग में बदलाव के लिए आरबीआई लिखित अनुमति पहले से लेनी पड़ती है। लेकिन अयोध्या फिनलीज लिमिटेड ऐसा करने में विफल रही। इसने इसने चुकता इक्विटी पूंजी के 26% से अधिक शेयरधारिता में बदलाव किया। आरबीआई के मंजूरी के बिना उठाया गया था।
यह एक्शन नियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य कंपनी या ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेन देन या एग्रीमेंट पर असर डालना नहीं है। इतना ही नहीं भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

