
RBI MPC Meeting: 4 अक्टूबर से तीन दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक का आयोजन होने जा रहा है। इसका समापन 6 अक्टूबर होगा। मीटिंग में 6 सदस्य मौजूद होंगे। रेपो रेट समेत अर्थव्यवस्था से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा होगी। बता दें कि एमपीसी की पिछली बैठक अगस्त में आयोजित हुई थी। इस बार भी बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव न होने की संभावना है।
महंगाई ने बढ़ाई आरबीआई की टेंशन
अगस्त महीने में खुदरा स्फीति के आँकड़े आरबीआई के काबू से बाहर रहें। इंफ्लेशन ने न सिर्फ आम जनता की बल्कि रिजर्व बैंक की चिंता भी बढ़ा दी है। वहीं 2023-24 के लिए आरबीआई द्वारा अनुमानित खुदरा मुद्रास्फीति 5.4% है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए 6.2%, तीसरी टिमशी के लिए 5.7% और चौथी तिमाही के लिए 5.2% अनुमान मुद्रास्फीति को लेकर लगाए गए हैं। आगामी वित्त वर्ष के पहले तिमाही के लिए अनुमानित मुद्रास्फीति 5.2% है।
विशेषज्ञों की राय
इक्रा लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में घट सकती है। दरें 5.5 फीसदी तक हो सकती है। टमाटर के भाव में गिरावट से फायदा होगा। इसलिए एमपीसी अक्टूबर में होने वाले दरों में कोई संशोधन नहीं करेगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार इस बार केन्द्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। नकदी की स्थिति सख्त होने के साथ-साथ मुद्रास्फीति भी ऊंचे स्थर पर है। यदि मुद्रास्फीति को लेकर आरबीआई के अनुमान को सही माने जाए तो तीसरी तिमाही में भी मुद्रास्फीति 5% से अधिक रहेगी। इसलिए 2023 में और संभवतः चौथी तिमाही में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा।
रेपो रेट में फरवरी में हुआ था बदलाव
बता दें कि अंतिम बार फरवरी में आयोजित हुई एमपीसी बैठक में रेपो दरों में वृद्धि करने का फैसला लिया गया था। वर्तमान में रेट 6.5%% है। जिसके बाद से दरें स्थिर हैं। ऐसे में खुदरा मुद्रास्फीति की स्थिति देखते हुए दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना है। रेपो रेट में वृद्धि का असर लोन और ईएमआई पर पड़ता है। उम्मीद है इस महीने भी आरबीआई लोन लेने वाले ग्राहकों को राहत देगा।

