जानिए कैसे हुई Cadbury की शुरुआत, Dairy Milk ने खोला किस्मत का ताला, पढ़ें जॉन कैडबरी की Success Story

कैडबरी ने न केवल ब्रिटेन में, बल्कि विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह चॉकलेट बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आयु वर्गों का पसंदीदा है।
जानिए कैसे हुई Cadbury की शुरुआत, Dairy Milk ने खोला किस्मत का ताला, पढ़ें जॉन कैडबरी की Success Story

Cadbury Success Story : कैडबरी (Cadbury) बहुत फेमस और पुरानी कंपनी है, जिसकी स्थापना लगभग 200 साल पहले हुई थी। यह कंपनी चॉकलेट के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसके प्रोडक्ट्स 50 से अधिक देशों में उपलब्ध हैं। बात करें भारत की तो यहां कैडबरी के मिल्क चॉकलेट का अलग ही क्रेज है। चाहे शहर हो या गांव, हर जगह कैडबरी की चॉकलेट का स्वाद लोग पसंद करते हैं। इसका नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। बता दें कि यह ब्रिटिश मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका हेड ऑफिस लंदन में स्थित है। कैडबरी ने न केवल ब्रिटेन में, बल्कि विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह चॉकलेट बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आयु वर्गों का पसंदीदा है। तो चलिए आज हम आपको कैडबरी के फाउंडर जॉन कैडबरी की सक्सेस स्टोरी बताते हैं।

1801 में हुआ था जन्म

सबसे पहले हम आपको बता दें कि कैडबरी के फाउंडर जॉन कैडबरी का जन्म 12 अगस्त 1801 को हुआ था। उन्होंने 1847 में अपने भाई बेंजामिन कैडबरी के साथ मिलकर कैडबरी कंपनी की शुरुआत की थी। बता दें कि जॉन बिजनेस फैमिली से बिलॉन्ग करते थे। हालांकि, शुरूआती दिनों में जॉन कैडबरी चाय, कॉफी और कोको बेचते थे। जिसके बाद उन्होंने बर्मिंघम में अपनी किराने की दुकान खोली, जहां उन्होंने ड्रिंकिंग चॉकलेट बेचना शुरू किया। उनका यह बिजनेस सफल रहा और यहीं से वह चॉकलेट का पैकेट बनाकर बेचना शुरू कर दिए। धीरे-धीरे कैडबरी चॉकलेट्स ने बाजार में अपनी पहचान बनाई। जॉन कैडबरी का यह कदम उनके बिजनेस के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उनकी मेहनत ने छोटे से किराने की दुकान से इंटरनेशनल चॉकलेट ब्रांड बना दिया।

घाटे का करना पड़ा था सामना

हालांकि, यह सिलसिला अभी थमा नहीं, बल्कि साल 1854 में जॉन ने लंदन में अपना नया ऑफिस खोला। अच्छी शुरुआत के बावजूद कंपनी को भारी घाटे का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, जॉन कैडबरी और उनके भाई बेंजामिन ने हार नहीं मानी और मेहनत से काम करते रहे। उनकी मेहनत ने आखिरकार उन्हें सफलता दिलाई। साल 1866 में उन्होंने कोको प्रेस का उपयोग करके कोको पाउडर बनाया, जिससे चॉकलेट और टेस्टी बनने लगा। इससे कंपनी फिर से मुनाफे में आ गई। वहीं, साल 1897 में कैडबरी ने डेयरी मिल्क चॉकलेट लॉन्च की, जिसने चॉकलेट की दुनिया में धूम मचा दी। बता दें कि इसकी पैकेजिंग काफी ज्यादा आकर्षक थी। साल 1914 तक डेयरी मिल्क कैडबरी का सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट बन गया।

मिला ये अवॉर्ड

कैडबरी ने अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत बनाने के लिए बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया। जिसके बाद कंपनी के विज्ञापनों ने ग्राहकों के बीच ब्रांड की छवि को और मजबूत किया। बता दें कि कंपनी ने ‘कुछ मीठा हो जाए’ और ‘पप्पू पास हो गया’ जैसी टैगलाइन पेश की, जो लोगों को काफी पसंद आई। इसके बाद कैडबरी ने अपनी मार्केटिंग रणनीति में बदलाव करते हुए “द रियल टेस्ट ऑफ लाइफ” नाम से एक नया कैंपेन शुरू किया। जिसके तहत एक एड बनाया गया, जिसमें एक लड़की क्रिकेट के मैदान पर चॉकलेट का मजा लेती हुए डांस करती है। यह विज्ञापन इतना ज्यादा फेमस हुआ कि इसे मुंबई के ऐड क्लब ने ‘द स्पैनिश ऑफ द सेंचुरी’ का अवॉर्ड दिया।

कैडबरी की नेट वर्थ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैडबरी की कुल नेट वर्थ 31 हजार करोड़ रुपये है। इसमें लगभग 55,000 कर्मचारी काम करते हैं। इसका डेयरी मिल्क चॉकलेट दुनियाभर में बेहद मशहूर भी है। वहीं, भारत की बात करें तो यहां भी डेयरी मिल्क चॉकलेट का खास स्थान है। बता दें कि कैडबरी ने पिछले 4 मार्च को 200 साल पूरे किए हैं। इन 200 सालों में यह कंपनी एक छोटे से कारोबार से बढ़कर इंटरनेशनल ब्रांड बन गई है। 100 से अधिक देशों में इसका मार्केट है। भारतीय बाजार में इसका 60 फीसदी हिस्सा है। कैडबरी आज विश्व की नंबर 1 कन्फेक्शनरी कंपनी है, जो चॉकलेट और कैंडी बनाती है। कंपनी के पोर्टफोलियो में 200 से अधिक प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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