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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में छात्रों के हित में बड़ी घोषणा की है। करियर गाइडेंस डैशबोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई काउंसलिंग हब और स्पोक स्कूल मॉडल लॉन्च किया गया है। अकादेमी स्टेशन 2025-26 तक लागू रहेगा। इसकी शुरुआत मार्गदर्शन और मनोसामाजिक सहायता दोनों की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ावा देना है। यह पहल शिक्षकों काउंसलर और स्वास्थ्य शिक्षकों के बीच बातचीत के बाद की गयी है।
करियर गाइडेंस डैशबोर्ड पर स्टूडेंट्स को भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। वहीं काउंसलिंग हब और स्कूल स्पोक मॉडल विद्यार्थियों के अच्छे मेंटल हेल्थ को सुनिश्चित करेगा। इसमें छात्रों के साथ-साथ अभिभावक और शिक्षकों के लिए भी गाइडलाइंस शामिल हैं। बोर्ड ने कहा कि, “यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, एक आमंत्रण है।स्कूलों को ऐसे स्थानों के रूप में परिकल्प करने का आमंत्रण, जहां शिक्षक और कल्याण साथ-साथ चलते हैं।हमें उम्मीद है कि यह पहल हर स्कूल को मानसिक शिक्षा का स्थान ही नहीं बल्कि देखभाल का समुदाय बनाने में मदद करेगी।”
करियर गाइडेंस डैशबोर्ड के बारे में
करियर गाइडेंस डैशबोर्ड के लिए लिंक https://cbsecareerguidance.in/ एक्टिव हो चुकी है। इस पर कई टूल्स और संसाधन उपलब्ध होंगे। जिसके जरिए स्टूडेंट्स को करियर के लिए अलग-अलग विकल्पों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा। ताकि वे भविष्य में क्या करें या क्या नहीं, कोई फैसला ले पाएं।वहीं सीबीएसई काउंसलिंग हब एंड स्पोक स्कूल मॉडल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाना है। ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नाम, पता, सब्जेक्ट कॉम्बिनेश, स्कूल का नाम, शैक्षणिक क्षेत्र ईमेल इत्यादि जानकारी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
काउंसलिंग हब और स्कूल स्पोक मॉडल
स्कूल स्पोक मॉडल के तहत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणालियों को स्थापित किया जाएगा। इसके जरिए बीच लर्निंग, क्षमता निर्माण और छात्र कल्याण के बेस्ट प्रैक्टिस को बढ़ावा देता है। सीबीएसई ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को सक्रिय रूप से लागू करने का अनुरोध किया है। निरंतर मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन के जरिए अच्छी तरह से विकसित भी करने को कहा है। भविष्य की तैयारी के लिए छात्रों के पोषण के लिए करियर मार्गदर्शन संसाधन का इस्तेमाल करना है।
इसके जरिए छात्रों केसमग्र कल्याण आवश्यकताओं की पहचान की जाएगी। शिक्षा पारिस्थितिक तंत्र के सहयोग से बच्चों, किशोरों और परिवारों के लिए मनोसामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जाएगा। एक व्यापक स्कूल परमिट सेवाओं की स्थापना होगी। देश भर में बुनियादी ढांचे और संसाधनों को मजबूत करने के लिए संरचनाओं और मानकीकरण करना है। सभी स्कूल हितधारकों के बीच ब्यापक आवश्यकताओं के बारे में जागरूकता को भी बढ़ता है।

