बोर्ड परीक्षा प्रश्न पत्रों पर CBSE ने मांगा स्कूलों का फीडबैक, इन 3 नियमों का करना होगा पालन, अहम नोटिस जारी 

सीबीएसई ने सही समय पर बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्रों पर स्कूलों से फ़ीडबैक मांगा। जरूरी नियम भी निर्धारित किए गए हैं। नोटिस में प्रक्रिया के दौरान होने वाली गलतियों की चर्चा भी की गई है।
cbse

सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू हो चुकी है। इसका समापन 4 अप्रैल को होने वाला है। इस बीच केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी एफिलेटेड स्कूलों को बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्र के ऑब्जरवेशन को लेकर महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। साथ ही बोर्ड एग्जाम पर फीडबैक भी मांगा है।

हर साल बोर्ड स्कूलों से ओईसीएमएस में सीबीएसई से प्रशासित प्रश्न पत्र के संबंध में अपनी टिप्पणियां और मुद्दे भेजने का अनुरोध करता है। इस प्रक्रिया के दौरान ने कई गलतियां देखी गई। जिन्हें निपटाने का निर्देश विद्यालयों को बोर्ड ने दिया है।

स्कूल करते हैं ये गलतियाँ 

स्कूल आमतौर पर अलग-अलग ईमेल आईडी पर टिप्पणी भेजते हैं, जो इस उद्देश्य के लिए नहीं होती। उस विषय में परीक्षा आयोजित होने के कई दिनों के बाद अवलोकन भेजे जाते हैं।  प्रश्न पत्रों पर भेजे गए फ़ीडबैक स्पष्ट भी नहीं होते हैं। स्कूल यह तो लिखते हैं कि “प्रश्न सही नहीं है, लेकिन प्रश्न में क्या सही नहीं है?” इसका उल्लेख के नहीं करते।

इन नियमों का करना होगा पालन 

इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों को तीन नियमों का पालन करने को कहा है। अवलोकन आईसीएमएस पोर्टल पर अपलोड किए जाने चाहिए। परीक्षा के आयोजन के दिन ही टिप्पणी भेजनी होगी। किसी भी प्रश्न के लिए स्कूल qpobservation@cbseshiksha.in पर ईमेल  स्कूल भेज सकते हैं।

काम पूरा न होने पर क्या होगा?

यदि कोई स्कूलों इन निर्देशों का पालन करने में विफल होता है तो सीबीएसई कोई कार्रवाई नहीं करेगा। बोर्ड ने कहा, ” यदि टिप्पणी स्पष्ट नहीं होती है, समय पर प्राप्त नहीं होती है, कबसे द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं त बोर्ड द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews