बंदियों को मिला महाकुंभ का पुण्यलाभ, जेल के अंदर पवित्र गंगाजल से स्नान करते ही झूम उठे, नाच गाकर मनाई ख़ुशी

जेलर ने एक बूढ़े बंदी से पूछा प्रयागराज नहीं जाना तो उसने मायूस होकर कहा हम कैसे जा सकते हैं? उसके बाद जेलर ने अपनी जेल के लिए प्रयागराज से 21 लीटर पवित्र गंगाजल मंगवाया। जिससे आज महाशिवरात्रि के दिन बंदियों ने स्नान किया ।
sub jail gangajal bath

Mahakumbh 2025: प्रयागराज में आयोजित हुआ महाकुंभ 2025 आज महाशिवरात्रि के अंतिम पर्व स्नान के साथ समाप्त हो रहा है, 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में डेढ़ महीने के दौरान 66 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी संगम में लगाई, जेल में बंद बंदियों के लिए ये संभव नहीं था वे मायूस थे और फिर उनकी मायूसी देखकर जेल प्रबंधन ने जो व्यवस्था की उससे वे ख़ुशी से झूम उठे।

महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ ही महाकुंभ अपनी पूर्णता की तरफ बढ़ रहा है, आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया, पूजन अर्चन कर पुण्य लाभ कमाया लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद कुछ बंदियों के मन में मलाल रह गे अकी यदि उन्होंने अपराध नहीं किया होता तो वे जेल में नहीं होते, उन्हें भी मौका मिल जाता तो वे भी अपने पापों का प्रायश्चित कर लेते।

बंदियों को मायूस देख जेलर ने की ये अभिनव व्यवस्था 

बंदियों की ये मनोदशा दमोह जिले के हटा उप जेल के जेलर नागेन्द्र चौधरी ने भांप ली, उन्होंने एक बूढ़े बंदी से पूछा प्रयागराज नहीं जाना तो उसने मायूस होकर कहा हम कैसे जा सकते हैं ? उसके बाद जेलर चौधरी ने अपनी जेल के लिए प्रयागराज से 21 लीटर पवित्र गंगाजल मंगवाया।

पूजा कर बच्चियों से कुंड में डलवाया गंगाजल 

पिछले सप्ताह गंगाजल आ गया और फिर आज के महाशिवरात्रि के विशेष पर्व स्नान के अवसर पर बंदियों के लिए स्नान की व्यवस्था की, गंगाजल से बंदियों के स्नान के लिए के कुंड बनाया गया, गंगाजल को बच्चियों की मदद से विशेष मंत्रोचार के साथ उस कुंड (टंकी) में डाला और उसकी पूजा अर्चना की।

गंगाजल का सिर पर स्पर्श होते ही झूम उठे बंदी  

इसके बाद जैसे ही बंदियों ने अपने ऊपर गंगाजल डाल मानों वे महाकुंभ में ही डुबकी लगा रहे हो ऐसे झूम उठे, जेल प्रबंधन द्वारा बुलाये गए ढोल नगाड़ों की धुन पर बंदी स्नान करते रहे और नाचते रहे , उनकी ख़ुशी देखते ही बनती थी । हटा उप जेल के इस प्रयास की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है, उम्मीद की जा रही है कि इस सकारात्मक पहल का बंदियों के स्वभाव पर भी प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में अपराध से तौबा करने का संकल्प लेंगे ।

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दमोह से दिनेश अग्रवाल की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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