एक एक दरवाजे पर शीश झुकाऊंगा आशुतोष को जिताऊंगा, दतिया उप चुनाव पर बोले डॉ नरोत्तम मिश्रा

नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस द्वारा BJP में फूट की बातों पर पलटवार करते हुए कहा कि दतिया की जनता को सब दिख रहा है कहाँ फूट है और कहाँ एकजुटता है ।
Dr Narottam Mishra Datia Bye election

Dr Narottam Mishra Datia Bye election

मध्य प्रदेश के दतिया में उप चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी के नाम की घोषणा के बाद मचा सियासी घमासान थम गया है, आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी में आशुतोष तिवारी ने अपना नामांकन फॉर्म दाखिल किया, मंच पर भाजपा की एकजुटता ने उन कयासों को दरकिनार करने का संदेश दिया जिसमें कांग्रेस फूट के दावे कर रही थी।

डॉ नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव की बागडोर संभाल ली है, वे आज अपने जाने पहचाने अंदाज में दिखाई दिए… उन्होंने मंच से कांग्रेस पर निशाने साधे और दतिया की जनता को भरोसा दिलाया कि कहीं कुछ बदला , सबकुछ पहले जैसा ही है और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर दतिया सीट जीतने जा रही है।

नरोत्तम मिश्रा का कांग्रेस पर निशाना 

डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन दिन से एक बात ही प्रचारित करवा रहे हो कि हमारा कार्यकर्ता नाराज है, भाजपा में फूट है तो ये बताओ आपके प्रत्याशी के नामांकन में अवधेश नायक क्यों नहीं गए , राजेन्द्र भारती क्यों बाहर खड़े रहे? उन्होंने कहा हम आशुतोष तिवारी के लिए छाती अडाए खड़ा है और एक एक कार्यकर्ता भी छाती अडाए खड़ा है।

एक एक कार्यकर्ता आशुतोष भैया के लिए प्राण झोंक देगा

डॉ नरोत्तम मिश्रा ने उनकी नाराजगी की बातों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा दतिया के मालिकों मेरी पार्टी ने मुझे बहुत दिया है, 30 साल विधायक बनाया, 15 साल मंत्री बनाया और क्या चाहिए पार्टी से? रात दिन पार्टी की पूरी सेवा करके मन वचन और कर्म से एक एक कार्यकर्ता आशुतोष भैया के लिए प्राण झोंक देगा, 16 जुलाई से यहीं डेरा डालेंगे कोई कार्यकर्ता घर नहीं बैठेगा, इतना कहते कहते नरोत्तम मिश्रा का गला रुंध गया उन्होंने कहा मैं एक एक दरवाजे पर शीश झुकाऊंगा..  एक एक गाँव जाऊंगाऔर आशुतोष को जिताऊंगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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