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कार्रवाई, कर्तव्य और करुणा : अवैध शराब पर छापे के बीच SDOP की मानवीय तस्वीर, रोते नवजात को सुरक्षित कर दिखाई संवेदनशीलता

Written by:Banshika Sharma
Published:
मध्य प्रदेश के दतिया में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक मानवीय तस्वीर सामने आई। SDOP आकांक्षा जैन ने कड़ाके की ठंड में रोते हुए एक नवजात शिशु को न सिर्फ संभाला, बल्कि दूध और गर्म कपड़ों का इंतजाम भी किया।
कार्रवाई, कर्तव्य और करुणा : अवैध शराब पर छापे के बीच SDOP की मानवीय तस्वीर, रोते नवजात को सुरक्षित कर दिखाई संवेदनशीलता

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में पुलिस की एक सख्त कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदना का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला। यहां अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम को एक रोता-बिलखता नवजात शिशु मिला, जिसे SDOP आकांक्षा जैन ने अपनी गोद में उठाकर न केवल चुप कराया, बल्कि उसके लिए दूध और गर्म कपड़ों की व्यवस्था भी की।

यह घटना उस समय हुई जब दतिया पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम अवैध शराब के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे रही थी। इसी दौरान अधिकारियों की नजर कड़ाके की ठंड में पड़े एक नवजात पर गई, जो भूख से लगातार रो रहा था।

वर्दी में दिखी ममता की छांव

मौके पर मौजूद अनुभाग दतिया की SDOP आकांक्षा जैन ने बच्चे की हालत देखकर तुरंत अपनी आधिकारिक भूमिका से आगे बढ़कर मानवीय पहल की। उन्होंने बिना देर किए बच्चे को गोद में उठा लिया और उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, SDOP ने तत्काल बच्चे के लिए दूध का इंतजाम करवाया और उसे ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े भी मुहैया कराए।

इस दौरान पुलिस की कार्रवाई जारी रही, लेकिन अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चे की देखभाल में कोई कमी न रहे। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भी पुलिस अधिकारी की इस संवेदनशीलता की प्रशंसा करने लगे।

पुलिस अधीक्षक ने फेसबुक पर की सराहना

बच्चे की हालत स्थिर होने के बाद उसे सुरक्षित देखरेख के लिए उसकी बड़ी बहन को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले की जानकारी दतिया पुलिस अधीक्षक ने अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट के जरिए साझा की। पोस्ट में SDOP आकांक्षा जैन के इस कार्य को मानवीय, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ बताते हुए उनकी सराहना की गई।

यह घटना दर्शाती है कि कानून का सख्ती से पालन कराने के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों का मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। SDOP जैन ने कर्तव्य और करुणा के बीच एक बेहतरीन संतुलन पेश किया है।