जयदीप कंपनी ने 2 महिने का पेमेंट रोका, मजदूरों ने की हड़ताल

जयदीप कंपनी ने 2 महिने का पेमेंट रोका, मजदूरों ने की हड़ताल

धार। मोहम्मद अंसारपीथमपुर, औद्योगिक क्षेत्र मैं उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक लॉक डाउन के समय की सैलरी के लिए अब श्रम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। आज बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर जयदीप गिलास धागा बनाने वाली कंपनी के महिला पुरुष श्रमिक श्रम कार्यालय परपहुंचे और जमकर नारेबाजी की, मैनेजमेंट मुर्दाबाद के नारे लगाए, जबकि केंद्र सरकार के आदेश थे की लॉक डाउन के दौरान बंद पड़े उद्योग अपने -अपने श्रमिकों को घर बैठे सैलरी दे लेकिन वहीं दूसरी और उद्योगपति केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं, जिसके कारण अप्रैल माह की सैलरी श्रमिकों की अटक गई है।वही श्रमिक भी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं, बीते 2 दिनों में 2 कंपनियों के बड़ी तादाद में श्रमिक, श्रम कार्यालय पर मैनेजमेंट मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए ज्ञापन देने पहुंचे ओर सैलरी न मिलने शिकायत दर्ज कराई। वही श्रमिकों सैलरी समस्या को सुनने के लिए औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर के विकास भवन पर सहायक उप संचालक स्वास्थ्य सुरक्षा अधिकारी राजेश यादव ऑफिस पर मौजूद नहीं थे, श्रमिकों द्वारा फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने शिकायत व्हाट्सएप करने के लिए कहा। अमूमन फोन पर ही नौकरी करते नजर आते हैं। हमने मौके पर जाकर जब पड़ताल की तो ऑफिस पर मौजूद नहीं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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