6 साल की नन्ही बच्ची ने मदद के लिये फोड़ी अपनी गुल्लक, कोरोना क्राइसिस के लिये दान किये पैसे

6 साल की नन्ही बच्ची ने मदद के लिये फोड़ी अपनी गुल्लक, कोरोना क्राइसिस के लिये दान किये पैसे

डिंडौरी। प्रकाश मिश्रा। कोरोना वायरस महामारी के चलते देश में अनेक दिहाड़ी मजदूर एवं अन्य कमजोर वर्ग के व्यक्ति सड़क पर आ गए हैं, जिनकी सहायता के लिये शासन प्रशासन हरसंभव सहायता कर रहे हैं साथ ही कई संगठन और लोग भी निजी रूप से मदद के लिये आगे आए हैं। इसी कड़ी में 6 साल की एक नन्ही बच्ची ने भी ऐसे लोगों की मदद के लिये अपनी गुल्लक फोड़ दी है।
ये है डिंडौरी की रहने वाली 6 वर्ष की कनिका, जिसने एसडीओपी के प्रोत्साहित करने पर अपने गुल्लक में जोड़े गए रुपयों को बेसहारा लोगों के भोजन एवं जरूरत के सामानों के लिए दान कर दिया है। कनिका जैन युवा व्यवसायी आशीष जैन की बेटी हैं। मंगलवार को रानी अवंती बाई चौक में ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अपने पिता के साथ पहुंची कनिका ने और यह कहकर अपनी गुल्लक एसडीओपी रवि प्रकाश के हाथों में सौंप दी कि इसे गरीबों के भोजन के लिए ले लीजिए। नन्ही बालिका की सहृदयता ने उपस्थित सभी अधिकारी और कर्मचारियों का मन मोह लिया। सभी के सामने गुल्लक को फोड़ कर उसमें रखे रुपयों को गिना गया जिसमें 3750 रुपए निकले। अनुविभागीय अधिकारी पुलिस रवि प्रकाश एवं डिंडौरी तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक अखिलेश दहिया ने बच्ची को धन्यवाद दिया और एक गुड़िया भी तोहफे में दी ।

https://youtu.be/5DdxHO1NwG8

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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