अब सेहत सखियां और आशा सहयोगिनी करेंगी ग्रामीण महिलाओं को जागरूक

अब सेहत सखियां और आशा सहयोगिनी करेंगी ग्रामीण महिलाओं को जागरूक

डिंडोरी। प्रकाश मिश्रा ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण आहार को संतुलित कर बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने की दिशा में सरकार कई तरह की योजनाओं का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में कर रही है। इसी क्रम में सहभागी सीख एवं क्रियान्वयन(पी एल ए) के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सेहत सखियों के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनके साथ ही आशा सहयोगियों को भी मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों से प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर आर के मेहरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार फिलहाल यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले के दो विकास खंडों डिंडोरी समनापुर के लगभग 300 गांवों में संचालित किया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम न्यूसिड संस्था जबलपुर के द्वारा आयोजित किए जा रहे हैं संस्था के प्रशिक्षक उमा गणेश लोधी ने बताया कि इसके अंतर्गत चार चार दिवसीय प्रशिक्षण महिलाओं को दिए जा रहे हैं ।

सेहत सखियों के रूप में प्रशिक्षित यह ग्रामीण महिलाएं अपने ग्राम स्तर पर अन्य महिलाओं को जागरूक करने, सही पोषण आहार की जानकारी देने तथा स्वास्थ्य संबंधी अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। जानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी मार्च महीने तक संपन्न किये जाएंगे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews