बेटे ने कहा और पिता ने बना दिया सेनेटाइजर टनल, 3 दिन में किया निर्माण

बेटे ने कहा और पिता ने बना दिया सेनेटाइजर टनल, 3 दिन में किया निर्माण

डिडोंरी/प्रकाश मिश्रा

दिल में जुनून काम करने की इच्छा शक्ति हो तो कम संसाधनों में भी बड़ा कार्य किया जा सकता है। ऐसा ही देखने को मिला डिंडोरी जिले में जहां कृषि विभाग में कार्यरत एक युवा कर्मचारी ने अपने बेटे के कहने पर महज 3 दिनों में सैनिटाइजर टनल बनाकर तैयार कर दिया।

डिंडोरी जिले के कृषि विभाग में कार्यरत उत्पल राज वानखेडे मूलतः ग्राम चंदना जिला बालाघाट के निवासी हैं, जिन्होंने अपने 7 वर्षीय बेटे साईं राज की प्रेरणा पाकर स्टरलाइजेशन चेंबर बनाया दिया । उत्पल राज ने बताया कि लॉक डाउन के चलते वे इस समय पूरा काम घर पर बैठकर ही कर रहे हैं । इसी बीच उनके बेटे साईं राज ने उन्हें सैनिटाइजर मशीन बनाने का सुझाव दिया। बेटे की बात को गंभीरता से लेते हुए उन्होने उसे पूरा करने का मन बना लिया । उत्पल राज ने बताया कि लॉक डाउन के चलते जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं कम संसाधनों के बीच ही उन्होंने अपने अन्य सहयोगी जगदीश बिसेन और अंकित बिठले के सहयोग से इस कार्य को पूरा किया है।

मीडिया से बात करते हुए उत्त्पल राज ने इस टनल को जिला अस्पताल को देने की इच्छा व्यक्त की है। उत्पल ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस, मास्क का उपयोग तथा सैनिटाइजर का प्रयोग ही एकमात्र उपाय है। जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में डॉक्टर एवं स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ एवं मरीज और उनके परिजन आते हैं इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सैनिटाइजर करना बड़ी चुनौती का काम है यदि सैनिटाइजर टनल का उपयोग जिला चिकित्सालय में तो अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उत्पल राज की मेहनत उस समय कामयाब हो जाएगी जब इस सैनिटाइजर चेंबर का फायदा अधिक से अधिक लोगों को मिलेगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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