
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का नाम हिंदी सिनेमा जगत का वो नाम है, जो आ भी अपनी अदाकारी से लोगों के बीच राज कर रहे हैं। 70 का दशक उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी पहचान मजबूत कर ली थी। लेकिन ‘शोले’ जैसी ऑलटाइम ब्लॉकबस्टर के बाद भी उन्हें बड़ी फिल्मों के ऑफर मिलने में मुश्किलें आ रही थीं। बता दें कि इंडस्ट्री में कई बार रिश्तों और समीकरणों के कारण मौके बनते और छिनते रहे। इसी दौरान एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसमें दोस्ती, समझौता और सितारों की किस्मत सब कुछ एक साथ जुड़ गया। दरअसल, यह किस्सा साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म ‘खून पसीना’ का है, जिसने अमिताभ बच्चन के करियर को और ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
70 के दशक के लोकप्रिय अभिनेता विनोद खन्ना अपनी दमदार एक्टिंग और करिश्माई पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते थे। निर्देशक ओम प्रकाश मेहरा के करीबी राकेश कुमार उस समय अपनी पहली फिल्म ‘खून पसीना’ बनाने की तैयारी में थे। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
रखी ये शर्त
फिल्म की कहानी लिखने के बाद सबसे पहले विनोद खन्ना को लीड रोल के लिए साइन किया गया। फिल्म के दूसरे अहम किरदार के लिए डैनी डेंजोंगप्पा का नाम तय हुआ। सबकुछ पटरी पर था, लेकिन जैसे ही राकेश कुमार ने फिल्म की स्क्रिप्ट अपने गुरु ओम प्रकाश मेहरा को सुनाई, तो हालात बदल गए। ओम प्रकाश मेहरा ने साफ शब्दों में कहा, “अगर मैं इस फिल्म को प्रोड्यूस करूंगा, तो लीड रोल अमिताभ बच्चन ही करेंगे।”
विनोद खन्ना का छिना मौका
दरअसल, मेहरा और अमिताभ उस समय अच्छे दोस्त थे। मेहरा उन्हें एक बड़ा सितारा बनते देखना चाहते थे। यह सुनकर राकेश कुमार असमंजस में पड़ गए। एक तरफ विनोद खन्ना से उनकी दोस्ती थी, तो दूसरी तरफ अपने गुरु की बात मानना भी जरूरी था ऐसे में जब राकेश ने यह बात विनोद खन्ना के सामने रखी, तो वह थोड़े हैरान जरूर हुए, लेकिन दोस्ती और रिश्तों को तवज्जो देते हुए उन्होंने सेकेंड लीड रोल निभाने का फैसला किया। यह कोई आसान निर्णय नहीं था।
ब्लॉकबस्टर रही फिल्म
उस दौर में विनोद खन्ना बड़े स्टार माने जाते थे, लेकिन उन्होंने विवाद खड़ा किए बिना साइड रोल स्वीकार किया। इस बदलाव की वजह से डैनी डेंजोंगप्पा को फिल्म से बाहर कर दिया गया। उनके हिस्से का किरदार भी अमिताभ और विनोद के बीच बांट दिया गया। फिर जब फिल्म 1977 में रिलीज हुई, तो वह बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। फिल्म ने शानदार बिजनेस किया और दर्शकों ने अमिताभ बच्चन की अदाकारी को खूब सराहा।
https://youtu.be/GvTXJAtpgZQ
मिला नया मोड
इस फिल्म की सफलता के धीरे-धीरे उन्हें लगातार बड़ी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। उनकी कलाकारों फैंस को इतनी ज्यादा पसंद आई कि वह एंग्री यंग मैन कहने लगे। उस दौर में जब भी एबी की फिल्में रिलीज होती थी, तो घंटों लोग लाइन में खड़े होकर टिकट खरीदा करते थे। ऐसे में कहा ज सकता है कि कब किसका करियर कहां चमक जाए, यह कोई नहीं जानता। विनोद खन्ना की जगह अमिताभ बच्चन को लीड रोल मिला और इस मौके ने उन्हें महानायक बना दिया। वहीं, विनोद खन्ना ने भी अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया।
रिश्ते में नहीं आई खटास
इस वजह से दोनों के बीच रिश्ते में आपसी मतभेद नहीं हुए। ऑनस्क्रिन के साथ-साथ ऑफस्क्रिन भी दोनों की जोड़ी हमेशा सबकी फेवरेट रही। आज भी महानायक सोनी टीवी में प्रसारित होने वाला मोस्ट वॉचड शॉ केबीसी में बतौर गेम होस्ट नजर आते हैं, जहां आए-दिन वह अपनी जिंदगी से जुड़ी कहानियां सुनाते रहते हैं। उनकी फिल्में आज भी लोगों को एंटरटेन कर रही है।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

