
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के दौरान हुई अभद्रता का मामला अब बढ़ता जा रहा है। दरअसल अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को पद से हटाने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखा है। रवींद्र पुरी का आरोप है कि मंदिर के कर्मचारी साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं और शिकायत के बाद भी जिम्मेदार कर्मचारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
दरअसल गुरुवार, 5 नवंबर को रवींद्र पुरी महाराज महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान जल द्वार के पास चेकिंग को लेकर उनकी सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में उनके साथ अभद्रता की गई और दर्शन के दौरान बेवजह रोक-टोक की गई। शुक्रवार को इस मामले में पत्र लिखने के बाद वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि वे दिल्ली में भी इस मामले की शिकायत करेंगे।
कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए रवींद्र पुरी

वहीं गुरुवार को हुई घटना के बाद रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्र सरकार तक शिकायत पहुंचाने की बात कही थी। घटना के बाद जल द्वार पर तैनात निरीक्षक जगदीश गोड को वहां की ड्यूटी से हटा दिया गया। उनकी जगह निरीक्षक राजू मालवीय को तैनात किया गया। हालांकि, रवींद्र पुरी महाराज संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते थे। उनका कहना था कि सिर्फ ड्यूटी बदलने से मामला खत्म नहीं होगा। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की ओर से उनकी मांग के मुताबिक कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखकर प्रशासक को हटाने की मांग कर दी।
पत्र में आरोप – ‘साधु-संतों को चेकिंग के नाम पर रोका गया’
दरअसल रवींद्र पुरी महाराज ने अपने पत्र में मंदिर प्रशासन के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ इस तरह का व्यवहार लंबे समय से देखने को मिल रहा है और उन्हें इस संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही हैं। रवींद्र पुरी महाराज ने पत्र में लिखा कि मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अधीनस्थ कर्मचारी साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने 5 नवंबर की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वे भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। प्रोटोकॉल के तहत जिन सहायक प्रशासक की ड्यूटी लगाई गई थी, वे भी तय समय पर मौजूद नहीं थे। पत्र के मुताबिक, मंदिर कर्मचारियों ने उन्हें यह कहकर रोका कि प्रशासक के सख्त आदेश हैं कि कोई भी साधु-संत बिना चेकिंग के दर्शन नहीं करेगा। इस दौरान उनके साथ अनावश्यक रोक-टोक की गई और दर्शन व्यवस्था में भी परेशानी हुई।
सिंहस्थ-2028 का भी जिक्र किया
वहीं रवींद्र पुरी ने पत्र में सिंहस्थ-2028 का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान यदि साधु-संतों के साथ मंदिर प्रशासन का ऐसा व्यवहार जारी रहा, तो इससे सनातन धर्म की प्रतिष्ठा और धार्मिक भावनाओं पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की है कि प्रथम कौशिक को तत्काल पद से हटाया जाए और उनकी जगह ऐसे अनुभवी अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए, जिसे धार्मिक परंपराओं की समझ हो और जो साधु-संतों के प्रति संवेदनशील हो।
रवींद्र पुरी बोले – संतों के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे
दरअसल रवींद्र पुरी ने कहा कि उन्होंने मंदिर प्रशासक से पहले ही कहा था कि आगे इस तरह का कोई विवाद नहीं होना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने प्रशासक को हटाने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आगे भी ऐसा विवाद हुआ तो मंदिर में कोहराम मच जाएगा। उनके शब्दों में, संतों के विरोधियों को मंदिर में नहीं रखा जाना चाहिए और उनके साथ हुए अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

