
बॉलीवुड की दुनिया बहुत ही अजीब है। यहां कब, किसकी किस्मत चमक जाए और कब कोई स्टार एकदम अंधेरे में गुम हो जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। इसी दुनिया में एक नाम चंकी पांडे है। जी हां, वही चंकी जिसे आज “आखरी पास्ता” के नाम से घर-घर में जाने जाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और हटके अंदाज पर लोग जान छिड़कते हैं, लेकिन जो इंसान आज हंसी का फुल डोज माने जाते हैं। उनकी शुरुआत किसी फिल्मी सेट या ऑडिशन रूम से नहीं हुई थी।
चंकी की पहली फिल्म का किस्सा इतना मजेदार है कि सुनकर आप भी हैरान रह जाओगे। हालांकि, आज हम आपको बताएंगे कि चंकी को बॉलीवुड का रास्ता किसी डायरेक्टर की ऑफिस मीटिंग में नहीं, बल्कि एक टॉयलेट के अंदर से मिला था।
टॉयलेट में अटके चंकी
कहानी 90 के दशक से पहले की है। चंकी पांडे उस वक्त फिल्मों में किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन स्ट्रगलर ही कहलाते थे। एक दिन वे एक फाइव-स्टार होटल में शादी की पार्टी में पहुंचे। सजधज कर गए थे, चुड़ीदार-पायजामा पहन रखा था। अब चुड़ीदार में सबसे बड़ी टेंशन उसका नाड़ा होती है। बांधने में तो सब एक्सपर्ट होते हैं, लेकिन खोलने में कई बार बवाल हो जाता है। चंकी के साथ भी वही हुआ। ऊपर से उन्होंने पार्टी में थोड़ा ज्यादा बीयर चढ़ा ली थी।
अब बीयर का असर हुआ और वह सीधे वॉशरूम पहुंच गए। वहां जाकर उन्हें नाड़ा खोलना था, लेकिन दिक्कत ये कि धागा फंस गया। हालत ये कि चंकी बुरी तरह पसीना-पसीना हो गए और वॉशरूम में चिल्लाने लगे “कोई है? मदद करो भाई!” ऐसे में बाहर लोग हंस-हंस कर लोटपोट हो रहे थे कि स्टार बनने की चाह रखने वाला बंदा टॉयलेट में फंसा हुआ है।
पहलाज निहलानी की एंट्री
वहां मौजूद लोगों को तो ये सीन सिर्फ कॉमेडी लग रहा था, लेकिन एक शख्स ऐसा था जिसने चंकी की हालत को देखा और मदद के लिए आगे बढ़ गया। ये कोई और नहीं, बल्कि उस दौर के मशहूर प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी थे, जिन्होंने गोविंदा के साथ इल्ज़ाम जैसी फिल्म बनाई थी। चंकी खुद बताते हैं कि जैसे ही उन्होंने पहलाज को देखा, वे दंग रह गए। हालत ये थी कि बिना हाथ धोए ही पहलाज से हाथ मिलाने दौड़ पड़े। खुद चंकी बाद में इस किस्से को याद करके पेट पकड़-पकड़ कर हंसते थे।
बेहोश होते-होते बच गए चंकी
एक इंटरव्यू के दौरान चंकी ने कहा था कि जब पहलाज ने खुद अपना नाम बताया तो वे सन्न रह गए। उन्होंने कहा, “आप पहलाज निहलानी हैं? आपने गोविंदा के साथ फिल्म बनाई है?” और इसी शॉक में वे लगभग बेहोश हो गए। इसके बाद किस्मत ने ऐसी करवट ली कि पहलाज निहलानी ने चंकी को अपनी फिल्म “आग ही आग” में कास्ट कर लिया। इस फिल्म का निर्देशन खुद पहलाज ने किया था। यहां से चंकी के करियर ने स्पीड पकड़ी और धीरे-धीरे उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली।
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आज जब चंकी इस किस्से को याद करते हैं तो कहते हैं, “अगर उस दिन पहलाज निहलानी वॉशरूम में मदद के लिए ना आते, तो शायद मैं फिल्मों में इतनी जल्दी एंट्री नहीं ले पाता।”
बदली किस्मत
आज भले ही लोग उन्हें “आखरी पास्ता” के नाम से जानते हैं और “हाउसफुल” जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग पर ताली बजाते हैं, लेकिन उनकी असली कहानी ये बताती है कि बॉलीवुड में कभी भी कुछ भी हो सकता है। यहां किस्मत किसी भी मोड़ पर आपका हाथ पकड़ सकती है, चाहे वो टॉयलेट ही क्यों न हो…
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

