
हिंदी सिनेमा का नाम जब भी लिया जाता है, उसमें राज कपूर अपने आप याद आ जाते हैं। उन्हें फैंस ‘शो मैन’ कहकर बुलाते थे। एक दौर केवल उन्हीं का जलवा था। इनकी फिल्में ब्लॉकबस्टर हुआ करती थी, थिएटर्स भीड़ से खचाखच भरे रहते थे। फिल्मों को लेकर उनका नजरिया, गानों को लेकर उनकी सोच और कहानियों को लेकर उनका जुनून ही उन्हें बाकी फिल्मकारों से अलग करता था। राज कपूर सिर्फ एक अभिनेता या निर्देशक नहीं थे, वो पूरे के पूरे सिनेमा थे। उनका जीना, उनका उठना-बैठना, उनकी सांसें… सबकुछ फिल्मों के लिए ही था।
उनके बारे में मशहूर संगीतकार रविंद्र जैन ने ऐसा दिलचस्प किस्सा सुनाया था, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज कपूर किस तरह हर चीज को सिनेमा के नजरिये से ही देखते थे।
रामायण का भजन
दरअसल, कहानी उस दौर की है, जब रविंद्र जैन रामानंद सागर की रामायण के लिए संगीत दे रहे थे। एक दिन वह राज कपूर के घर पहुंचे और उन्हें भजन सुनाया “ओ मैया मोरी, का ठानी मन में, राम सिया भेज दए री बन में…”। भजन सुनते ही राज कपूर सन्न रह गए। उनकी आंखों में नमी थी और मन भारी हो गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि गाना तो बहुत अच्छा है, रोंगटे खड़े हो गए, लेकिन अब तुम मेरी फिल्म हिना में काम नहीं कर सकते। ये सुनकर रविंद्र जैन परेशान हो गए। समझ ही नहीं पाए कि आखिर राज कपूर ने ऐसा क्यों कहा। भजन में ऐसी क्या बात थी, जिसने उन्हें अंदर तक उदास कर दिया था।
अचानक कही ये बात
इस बात के कुछ दिनों बीत जाने के बाद राज कपूर के मैनेजर का फोन आया कि राज साहब ने कहा है कि कश्मीर चलना है। रविंद्र जैन बिना सवाल किए तैयार हो गए। उन्हें लगा शायद वहां जाकर हिना पर चर्चा होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वहां वह पूरे 25 दिन कश्मीर में रहे। कभी पहलगाम, कभी गुलमर्ग, कभी डल झील सैर की। वहां न संगीत की चर्चा हुई, न फिल्म की… बस सुबह से शाम तक खाना-पीना, गपशप और घूमना होता रहा। रविंद्र जैन हैरान थे कि इतने दिन काम छोड़कर आए, लेकिन राज कपूर उनसे संगीत की एक भी बात नहीं कर रहे।
क्यों ले गए थे कश्मीर
बाद में यह बात समझ में आई कि राज कपूर उन्हें इसलिए कश्मीर लेकर गए थे, ताकि उनके दिमाग से रामायण का असर मिट जाए और हिना की सोच बैठ सके। राज कपूर ने हिना फिल्म के लिए रविंद्र जैन के साथ तीन गाने रिकॉर्ड कर लिए थे। उनमें से एक मशहूर गीत था, “मैं देर करता नहीं देर हो जाती है…”। लेकिन राज कपूर फिल्म पूरी होते-होते दुनिया छोड़ गए। इसके बाद रणधीर कपूर ने फिल्म को पूरा किया और रविंद्र जैन को फ्री हैंड दिया।
एक अलग किस्सा
राज कपूर की सोच हमेशा गहरी और अलग होती थी। एक बार उन्होंने रविंद्र जैन से कहा कि लोग मुझे माफ नहीं करेंगे अगर मैं कहूं कि राम तेरी गंगा मैली हो गई है। पहले ही जिस देश में गंगा बहती है बना चुका हूं। अब इसे जस्टिफाई कैसे करूं? इस पर रविंद्र जैन ने तुरंत मुखड़ा गुनगुनाया “गंगा हमारी कहे बात ये रोते-रोते, राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते-धोते। ये सुनते ही राज कपूर ने राहत की सांस ली और कहा कि अब मेरी समस्या हल हो गई। यही वो लाइन थी, जिसने राम तेरी गंगा मैली की नींव मजबूत की।
रविंद्र जैन बताते थे कि राज कपूर सिर्फ फिल्म बनाने तक सीमित नहीं थे। वो गीत-संगीत की बारीकियों को गहराई से समझते थे। उन्हें भजन, सूफियाना संगीत और भारतीय धुनों की गहरी पकड़ थी। यही वजह थी कि उनकी फिल्मों के गाने हमेशा अमर हो जाते थे। एक्टर कलाकारों को सिर्फ म्यूजिक डायरेक्टर या सिंगर नहीं मानते थे, बल्कि परिवार की तरह रखते थे। उनकी मेहमाननवाज़ी भी उतनी ही मशहूर थी। कृष्णा भाभी घर में सबका ख्याल रखती थीं। यहां तक कि रविंद्र जैन के लिए अलग से खिचड़ी बनवाई जाती थी।
रविंद्र जैन की श्रद्धांजलि
रविंद्र जैन अक्सर कहते थे, “राज ने वर्षों दिल पर राज किया, अपने अंदाज से जिंदगी को जिया, दे गया जाते-जाते निशानी यही, उसने गंगा को मैला न होने दिया।”
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

