
बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार हम सभी के फेवरेट हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर लोगों के बीच अलग ही पहचान बनाई है। उनकी टक्कर अभी के जेनरेशन वाले स्टार्स भी नहीं कर सकते हैं। इतनी उम्र होने के बाद भी वह एनर्जी बहुत कम ही लोगों में देखने को मिलती है। वह रोज सुबह 4:00 बजे उठकर अपनी डेली रूटीन को फॉलो करते हैं, इस कारण वह एकदम फिट एंड फाइन हैं। कॉमेडी से लेकर एक्शन, हॉरर, क्राइम से जुड़ी फिल्में कर चुके अभिनेता एक बार फिर मीडिया में चर्चा का विषय बन गए हैं। इससे पहले वह अपनी फिल्म हाउसफुल 5 को लेकर चारों ओर छाए हुए थे, वहीं अब वह जॉली एलएलबी 3 को लेकर लाइमलाइट में हैं।
अक्षय कुमार और अरशद वारसी की आने वाली फिल्म जॉली एलएलबी 3 ने रिलीज होते ही धमाल मचा दिया है। ये फिल्म कोर्टरूम ड्रामा और कॉमेडी का ऐसा तड़का लेकर आई है, जिसने दर्शकों को अंत तक जोड़े रखा है।
आमने-सामने दो एक्टर
आठ साल बाद सुभाष कपूर अपनी इस फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त लेकर लौटे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कोर्टरूम में दोनों जॉली अरशद वारसी और अक्षय कुमार आमने-सामने खड़े हैं। फिल्म की शुरुआत होती है राजस्थान के परसौल गांव से। यहां एक गरीब किसान राजाराम सोलंकी अपनी पुश्तैनी जमीन उद्योगपति हरिभाई खेतान को बेचने से मना कर देता है। खेतान का ड्रीम प्रोजेक्ट “बीकानेर टू बोस्टन” पूरा करने के लिए यह जमीन जरूरी है। किसान कर्ज भी नहीं चुका पाता और अंत जमीन छिनने के दुख में आत्महत्या कर लेता है। राजाराम की मौत के बाद उसकी पत्नी जानकी इस लड़ाई को अदालत तक ले जाती है।
कहानी में नया मोड
दिल्ली कोर्ट में पहली सुनवाई के दौरान एक तरफ जानकी का केस लड़ते जगदीश त्यागी उर्फ जॉली हैं, तो दूसरी ओर उसके खिलाफ जगदीश्वर मिश्रा यानी दूसरा जॉली खड़े होते हैं। इसके लिए जॉली 2 को 50 हजार रुपये के साथ एक दिन की 50 हजार फीस के साथ हरिभाई खेतान उसे जॉब पर रख लेते हैं, लेकिन जैसे ही वह घर पहुंचता है, सामने अम्मा को बैठा देख अपने फैसले पर पछताता है। फिर माफी मांगकर केस में न्याय के लिए लड़ने की तैयारी करता है। शुरुआत में दोनों की टक्कर जमकर होती है, लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों जॉली मिलकर खेतान और उसकी टीम का सामना करने का फैसला करते हैं।
View this post on Instagram
इंटरवल के बाद असली ड्रामा
वहीं, दूसरी तरफ उद्योगपति की पैरवी हाई प्रोफाइल वकील विक्रम (राम कपूर) कर रहे हैं, जिनकी दलील है कि विकास ‘बुलेट ट्रेन की रफ्तार’ से होना चाहिए। इंटरवल के बाद अदालत के अंदर असली ड्रामा शुरू होता है। यहां सौरभ शुक्ला का जज वाला किरदार पूरे रंग में नजर आता है। उनकी हाजिरजवाबी, टाइमिंग दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करते हैं।
लेखक ने कहानी में कई वास्तविक घटनाओं को सांकेतिक तौर पर पिरोया है। किसानों की जमीन अधिग्रहण और आत्महत्या जैसे मुद्दों को बड़े परदे पर लाने की कोशिश की गई है। साल 2013 में आई जॉली एलएलबी ने दर्शकों को हंसी, व्यंग्य और अदालती ड्रामे का ऐसा मिश्रण दिया, जो लंबे समय तक याद रहा। इसके बाद साल 2017 में जॉली एलएलबी 2 आई, जहां कहानी, अंदाज और मुद्दे तो बदले लेकिन जॉली की मासूमियत और ईमानदारी वही रही।
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार को इस बार ज्यादा दमदार डायलॉग और स्क्रीन स्पेस मिला है। अरशद वारसी अपने पुराने अंदाज में हैं और दोनों की जोड़ी कोर्टरूम ड्रामे को मजेदार बनाती है। सीमा बिस्वास अपने शांत मगर प्रभावशाली अभिनय से दिल छू जाती हैं। उनकी आंखों में दर्द और संघर्ष साफ झलका है। वहीं हुमा कुरैशी और अमृता राव का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन अगर कोई इस फिल्म की असली जान है, तो वो सौरभ शुक्ला हैं। जज के किरदार में उनकी मौजूदगी हर सीन को खास बना देती है। उनकी एक-एक लाइन पर दर्शक हंसी से लोटपोट होते हैं और गंभीर मुद्दे भी हल्के-फुल्के अंदाज में असर छोड़ जाते हैं।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

