
भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री में पौराणिक किरदारों को निभाना हमेशा से कलाकारों के लिए चुनौती रहा है। इसके लिए उन्हें कई तरह की तैयारियों करनी पड़ती है। खासकर जब बात भगवान राम और रावण जैसे दो विपरीत पात्रों की हो, तब तो यह और भी ज्यादा मुश्किलों से भरा होता है। एक मर्यादा पुरुषोत्तम है, तो दूसरा अहंकार का प्रतीक है। हम सभी के जहन में दोनों ही लोगों की छवि दिमाग में बैठी है, लेकिन सिनेमा की दुनिया में एक ऐसा भी अभिनेता है, जिसने इन दोनों चरित्रों को इतनी नजाकत से निभाया कि दर्शक आज भी उन्हें याद करते हैं।
दरअसल, इस एक्टर का नाम महानायक नंदमुरी तारक रामा राव (एनटी रामाराव) है, जो कि दक्षिण भारतीय सिनेमा का अभिनेता है। इसने पर्दे पर भगवान राम और रावण दोनों के किरदार को निभाया है, जिसे दर्शकों ने दोनों ही रूप में प्यार दिया है।
एनटी रामाराव
बता दें कि एनटी रामाराव बेहतरीन कलाकार थे, जो उस युग के प्रतीक बने। साल 1958 में आई फिल्म ‘भूकैलास’ में एनटी रामाराव ने पहली बार रावण का किरदार निभाया था। यह रोल उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि दर्शक उन्हें पहले से एक धार्मिक और सकारात्मक छवि में देख चुके थे। लेकिन उन्होंने रावण के चरित्र को एक अलग अंदाज में पेश किया। इसमें वह गर्वीला, ज्ञानी साथ ही अपनी गलतियों से जूझता हुआ इंसान के रुप में खुद को पेश किया। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई, पर रावण के रूप में एनटीआर का अभिनय लोगों के दिलों में उतर गया।
राम और रावण का किरदार
उसके बाद साल 1961 में फिल्म ‘सीता राम कल्याणम’ आई, जिसमें उन्होंने एक बार फिर रावण का किरदार निभाया। इस बार उन्होंने लंका के राजा की भूमिका को भावनाओं से भरा। दर्शकों ने इस बार उन्हें खलनायक नहीं, बल्कि एक त्रासदीपूर्ण चरित्र के रूप में देखा। इसके दो साल बाद यानी 1963 में एनटी रामाराव ने फिल्म ‘लव कुश’ में भगवान राम का किरदार निभाया। यहीं उन्होंने सिनेमा में एक ऐसा इतिहास रच दिया, जो आज तक कोई नहीं दोहरा सका। राम और रावण दोनों के रूप में उन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर अमिट छाप छोड़ी।
View this post on Instagram
पौराणिक फिल्मों के प्रतीक बने एनटीआर
एनटी रामाराव का दौर 1960 और 1970 के दशक में तेलुगु सिनेमा का स्वर्णकाल कहा जाता है। उन्होंने लगभग हर दूसरे पौराणिक किरदार को जीवंत किया। उन्होंने श्री कृष्ण, अर्जुन, भीम, शिव, विष्णु जैसे कई देवताओं का रोल निभाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब 17 फिल्मों में भगवान कृष्ण की भूमिका निभाई। बता दें कि 1970 के दशक में आंध्र प्रदेश में एनटीआर के नाम पर मंदिर बनाए गए, जहां उनके निभाए किरदारों श्रीराम और श्रीकृष्ण की मूर्तियां स्थापित की गईं। उनके फैंस के लिए उनका घर किसी तीर्थस्थल से कम नहीं था।
देवता से जननेता तक की यात्रा
एनटी रामाराव सिर्फ पर्दे के भगवान नहीं थे, बल्कि उन्होंने असल जिंदगी में भी लोगों की उम्मीदों का दायित्व उठाया। 1982 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। जिस तरह उन्होंने सिनेमा में भगवानों के रूप में जनता का दिल जीता था, उसी तरह राजनीति में भी वे जनता के मसीहा बन गए। उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी कि लोग उन्हें असली राम या कृष्ण समझ बैठते थे।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

