हिमाचल प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर नई बहस छिड़ गई है। दरअसल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने महिलाओं के अधिकारों के साथ न्याय नहीं किया। वहीं उनका आरोप है कि जब देश में महिलाओं को राजनीति में ज्यादा हिस्सेदारी देने का मौका आया तब कांग्रेस ने इसका समर्थन नहीं किया। दरअसल प्रेस वार्ता में राजीव बिंदल ने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक ताकत देने के लिए बड़ा कदम उठाया था।
उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष संसद सत्र बुलाकर महिला आरक्षण कानून को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन बिंदल का आरोप है कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस पहल को कमजोर करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का रवैया महिलाओं के हित में नहीं रहा।
महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी का आरोप
दरअसल बीजेपी नेताओं का कहना है कि नारी शक्ति वंदन अभियान महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता खोलता है। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि यह कदम देश की आधी आबादी को राजनीतिक फैसलों में सीधी भागीदारी देने के लिए उठाया गया था। राजीव बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई दशकों तक महिला आरक्षण का मुद्दा लटकाए रखा। उनके मुताबिक जब इसे लागू करने का मौका आया तो पार्टी ने इसे लेकर साफ रुख नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को राजनीति में मजबूत बनाना है तो ऐसे कानूनों को जल्द लागू करना जरूरी है।
23 अप्रैल को शिमला में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’
वहीं बीजेपी का कहना है कि महिला आरक्षण सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का भी कदम है। इससे पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की संख्या बढ़ सकती है और नीति बनाने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज ज्यादा मजबूत होगी। दरअसल राजीव बिंदल ने बताया कि महिला अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के मुद्दे को लेकर 23 अप्रैल को शिमला में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ निकाली जाएगी। बीजेपी का दावा है कि इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी और कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज करेंगी।
इसके साथ ही प्रेस वार्ता में उन्होंने हिमाचल सरकार पर पंचायत और नगर निकाय चुनाव टालने का भी आरोप लगाया है। दरअसल बिंदल का कहना है कि अगर स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर नहीं होते तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग को राज्यपाल को पत्र लिखना पड़ा, जो इस विवाद की गंभीरता को दिखाता है।






