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आज दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन करेंगे हिमाचल के किसान-बागवान, अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में निकालेंगे जन आक्रोश रैली

Written by:Banshika Sharma
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हिमाचल प्रदेश के हजारों किसान और बागवान आज दिल्ली के रामलीला मैदान में 'जन आक्रोश रैली' कर रहे हैं। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से अमेरिका से सेब पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 25% करने के फैसले के खिलाफ है, जिससे राज्य के 5500 करोड़ के सेब उद्योग पर संकट मंडरा रहा है। इसके अलावा मनरेगा और नए श्रम कानून भी विरोध के एजेंडे में शामिल हैं।
आज दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन करेंगे हिमाचल के किसान-बागवान, अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में निकालेंगे जन आक्रोश रैली

केंद्र सरकार की व्यापारिक नीतियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों का गुस्सा आज दिल्ली की सड़कों पर उतर आया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगभग 3000 से अधिक प्रदर्शनकारी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘जन आक्रोश रैली’ के लिए जुटे हैं। इनका सबसे बड़ा विरोध अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर है, जिसके तहत सेब पर आयात शुल्क आधा कर दिया गया है।

यह प्रदर्शन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त आह्वान पर हो रहा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला बागवान भी शामिल हैं, जो बीती रात ही दिल्ली के लिए कूच कर चुकी थीं।

5500 करोड़ का सेब उद्योग संकट में क्यों?

प्रदर्शनकारियों की मुख्य चिंता केंद्र सरकार द्वारा अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का फैसला है। माकपा नेता और सेब बागवान सोहन ठाकुर के अनुसार, इस फैसले से विदेशी सेब भारतीय बाजारों में बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यह कदम सीधे तौर पर हिमाचल के लगभग 5500 करोड़ रुपये के सेब उद्योग को बर्बाद कर देगा। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां की एक बड़ी आबादी की आजीविका सेब उत्पादन पर ही निर्भर है, इस निर्णय का सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

“केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ट्रेड डील करके देश के किसानों को बर्बाद करना चाह रही है। इस आक्रोश रैली में हिमाचल के अलावा देश के सभी राज्यों से हजारों किसान-बागवान और मजदूर शामिल होने वाले हैं।” — राकेश सिंघा, पूर्व विधायक (माकपा)

केवल सेब ही नहीं, ये मुद्दे भी हैं शामिल

ठियोग से माकपा के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने स्पष्ट किया कि रैली का एजेंडा सिर्फ सेब तक ही सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों को भी उठाएंगे। इनमें प्रमुख मांगें हैं:

  • मनरेगा की बहाली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की जा रही है।
  • श्रम कानूनों का विरोध: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग भी इस प्रदर्शन का एक अहम हिस्सा है। सिंघा ने कहा कि ये कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।

इस बड़ी रैली से पहले, किसानों और बागवानों को जागरूक करने के लिए हिमाचल के गांवों में नुक्कड़ सभाओं और नाटकों का आयोजन किया गया था। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि केंद्र की नीतियां किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही हैं।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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