स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए अभिभावक, बैठक कर लिया निर्णय नही भरेंगे फीस

स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए अभिभावक,  बैठक कर लिया निर्णय नही भरेंगे फीस

इटारसी, राहुल अग्रवाल| इन दिनों एक मुद्दा बहुत गर्माता जा रहा है । स्कूल प्रबंधन और अविभावक आमने सामने है। एक तरफ स्कूल (School) का तर्क दूसरी ओर अविभावक का दर्द अविभावको का कहना है कि स्कूलों के द्वारा फीस (School Fees) के नाम पर कोटि रकम वसूली जा रही है। व दबाब डाला जा रहा है कि फीस भरो या परीक्षा नही देने दी जाएगी|

पहली बार ऐसा देखने को मिला कि सभी अविभावक एक जुट होकर स्कूलों के खिलाफ खड़े है मामला इटारसी (Itarsi) का है। जहाँ आज मिनी गाँधी स्टेडियम में लगभग 400 सभी स्कूलों के अभिभावकों अपनी उपस्थित हुए और स्कूलों की मनमानी वसूली ओर दंबगई के विरूद्ध आवाज उठाने का निर्णय लिया । अविभावक नीरज जैन ने बताया कि हमारा प्रमुख मुद्दा निज़ी स्कूलों द्वारा मंथली टेस्ट और परीक्षा से वंचित करने का दबाब देकर ट्यूशन फीस के नाम पर भारी भरकम फीस की वसूली की जा रही है। जबकि शिक्षा के अधिकार के नियम के तहत किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा या टेस्ट या शिक्षा से वंचित नही किया जा सकता। इसी विषय को लेकर समस्त अभिभावकों की ये आवश्यक बैठक गांधी मिनी स्टेडियम मे रखी गई । सभी ने निर्णय लिया कि जब तक स्कूल पूरी तरह चालू नही होते कोई भी स्कूल फीस नही भरेगा

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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