इंदौर पुलिस ने पकड़े तीन बांग्लादेशी अपहरणकर्ता

इंदौर पुलिस ने पकड़े तीन बांग्लादेशी अपहरणकर्ता

इंदौर। इंदौर की हीरानगर पुलिस द्वारा 8 फरवरी को पकड़े  चार आरोपियों में से तीन बांग्लादेश के रहने वाले निकले हैं। दरअसल  5 फरवरी 2020 को 6  बजे फिरौती के लिए मनोहर पाल के पुत्र अनिल पाल का, जो गौरी नगर में रहता था, अपहरण कर लिया गया था और दो लाख रू की फिरौती मांगी गई थी। इस प्रकरण में पुलिस के द्वारा आरोपी किशोर, मेघा पति किशोर  रोनी शेख पिता रोहित शेख ,ओलिवर पुत्री हैदर को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी  बिना पासपोर्ट के भारत में प्रवेश किए रह रही हैं।और इन दोनों को देह व्यापार के लिए किशोर खंडारे के पास लाया गया था। एक अन्य आरोपी मेघा खंडारे भी बांग्लादेश की नागरिक है जो बिना किसी वैध पासपोर्ट के मुंबई आए और  देह व्यापार का काम करती रही। इन आरोपियों के पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट भी जप्त हुए हैं। साथी ही साथ इनके पास भारत के पासपोर्ट भी है। इन लोगों ने मरीमाता चौराहेके पास रहने वाले कंप्यूटर की दुकान चलाने वाले शिव कुमार यादव के माध्यम से फर्जी मार्कशीट तैयार करें करायी। पूरे मामले में आरोपी अशोक अग्रवाल से हुई पूछताछ से भी खुलासा हुआ है कि इसने सौ से भी ज्यादा नकली अंकसूची पांचवी और आठवीं क्लास की बनाई ।इसी के साथ किशोर खंडारे नक़ली नोट भी छाप ता है। पुलिस ने इस प्रकरण में धोखाधड़ी करने कूट रचना करने नकली नोट चलाने और पासपोर्ट अधिनियम के उल्लंघन सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किए हैं। इस कार्रवाई में एसएसपी रुचि वर्धन के मार्गदर्शन में थाना हीरा नगर के उप निरीक्षक जगदीश मालवीय की सराहनीय भूमिका रही।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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