बिल्डिंग में 70 पॉजिटिव मिलने के अनाउंसमेंट से मच गया हड़कंप, चौकीदार, बाई काम छोड़ गए

बिल्डिंग में 70 पॉजिटिव मिलने के अनाउंसमेंट से मच गया हड़कंप, चौकीदार, बाई काम छोड़ गए

इंदौर, आकाश धोलपुरे| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में कोरोना (Corona) की वापसी ने मुसीबत बढ़ा दी है| सबसे ज्यादा स्थिति इंदौर (Indore) में ख़राब नजर आ रही है, जहां रोजाना 500 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं| नए मामले शहर भर में मिल रहे हैं| इस बीच कोरोना संक्रमण की एक अफवाह ने लोगों में सनसनी फैला दी| जब एक गाड़ी ने अनाउंस कर दिया कि इस बिल्डिंग में 70 लोग कोरोना संक्रमित हैं। यह सुनते ही चौकीदार और कामवाली बाई काम छोड़ चले गए। यही नहीं कुछ लोग तो घर छोड़कर कहीं और रहने चले गए, जो बचे वे खौफ में रहे|

दरअसल, रेसकोर्स रोड पर गली नंबर – 2 में प्रशासन और निगम की टीम ने यहां एक बिल्डिंग को सील कर दिया है। यहां एनाउंस कर दिया गया कि बिल्डिंग में 70 लोग पॉजिटिव मिले है| यह सुनकर इलाके में हड़कंप मच गया| वहीं चौकीदार और कामवाली बाई काम छोड़ चले गए।

अब सोमवार को यहां के रहवासी इस कार्रवाई के विरोध में उतर आए और सवाल किया कि 41 फ्लैट की मल्टी में करीब 100 लोग रहते हैं, इसमें से 70 पॉजिटिव कैसे आ सकते हैं| उनका कहना है कि लॉकडाउन के पहले से अब तक सिर्फ 10 से 12 लोग पॉजिटिव आए हैं। उन्होंने भी पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद सोसायटी में इसकी सूचना दी और इलाज करवाया। अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां के 70 लोगों को पॉजिटिव बताए जाने की बात गलत है। इसी बिल्डिंग में एक शादी भी होने वाली है, स्वास्थ्य विभाग ने बिल्डिंग सील कर दी है, ऐसे में यह शादी टलने की संभावना बढ़ गई है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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